आज (गुरुवार) को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सूरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रैली की, और वहां का नजारा दिल छू लेने वाला था. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम मोदी ने रैली की एक तस्वीर साझा की, जिसमें पूरी मैदान समर्थकों से भरी दिखाई दे रही थी. उनके आने का इंतजार करते हुए लोग पहले ही जमा हो चुके थे, और उत्साह का माहौल पूरे इलाके में देखने को मिल रहा था.
प्रधानमंत्री ने रैली स्थल की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि बीरभूम में लोगों का उत्साह यह बताने के लिए काफी है कि बंगाल का मिजाज क्या है. उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “मैदान लोगों से खचाखच भरा है, जो अपना आशीर्वाद बरसाने आए हैं. पश्चिम बंगाल में हर तरफ बस भाजपा ही भाजपा नजर आ रही है.”
आपको बता दें कि यह गुरुवार को बंगाल में पीएम मोदी का तीसरा कार्यक्रम था. इससे पहले वे हल्दिया और आसनसोल में बड़ी जनसभाएं कर चुके थे. दिन की आखिरी रैली होने के बावजूद समर्थकों की ऊर्जा और भारी भीड़ ने यह साफ कर दिया कि चुनाव को लेकर जनता में कितनी उत्सुकता है.
सूरी से भाजपा उम्मीदवार जगन्नाथ चटर्जी ने इस भीड़ को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया. उन्होंने कहा कि लोग पूरे जिले से खुद चलकर आए हैं और यह इस बात का सबूत है कि इस बार बंगाल में सत्ता परिवर्तन की लहर चल रही है.
रैली में आए लोगों की बातें सुनकर भी राज्य की मौजूदा स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. वहां मौजूद एक महिला समर्थक ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, “हम चाहते हैं कि यहां भाजपा आए क्योंकि हम सुरक्षित महसूस नहीं करते. रात 8 बजे के बाद घर से बाहर निकलने में डर लगता है. हमें वह सुरक्षित माहौल चाहिए जो देश के बाकी हिस्सों में है.” वहीं, युवाओं ने विकास और रोजगार को अपनी प्राथमिकता बताया.
सूरी की रैली से पहले आसनसोल में एक ऐसा पल आया जिसने सबका ध्यान खींच लिया. भीड़ में से एक व्यक्ति ने हाथ में पोस्टर ले रखा था, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा था— “आदरणीय मोदी जी, कृपया पश्चिम बंगाल को बचाएं.” उस पोस्टर पर राज्य की कई गंभीर समस्याओं जैसे भ्रष्टाचार, घुसपैठ, बेरोजगारी और खराब कानून-व्यवस्था का जिक्र था. यह भावुक अपील बताती है कि जमीनी स्तर पर जनता किन मुद्दों से जूझ रही है.
बंगाल में चुनावी जंग अब निर्णायक मोड़ पर है. राज्य में दो चरणों में मतदान होना है. पहला चरण 23 अप्रैल को (152 सीटें) और दूसरा चरण 29 अप्रैल को (142 सीटें) होगा. इसके बाद 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तब साफ होगा कि बीरभूम और आसनसोल की इस भीड़ ने जो संकेत दिया हैं, वे वोट में कितना बदल पाता हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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