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AI का खतरनाक खेल! शशि थरूर के ‘डीपफेक’ वीडियो से मचा हड़कंप, पाकिस्तान की तारीफ वाले दावों पर कांग्रेस सांसद ने तोड़ी चुप्पी

कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर के पुराने इंटरव्यू को AI टूल्स से तोड़-मरोड़कर नए डीपफेक वीडियो वायरल किए जा रहे हैं, जिसमें उन्हें पाकिस्तान की तारीफ करते और मोदी सरकार की आलोचना करते दिखाया गया है. थरूर ने इन फर्जी वीडियो पर गहरी निराशा जताते हुए जनता से अपील की कि अगर कोई बयान उनके आधिकारिक X हैंडल या मूल मीडिया संस्थान पर नहीं है, तो उसे फेक मानें…

Shashi Tharoor on the Deepfake Video: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद डॉ. शशि थरूर इन दिनों तकनीकी धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनके कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिन्हें पहली नज़र में देखकर पहचानना नामुमकिन है कि वे असली हैं या नकली.

इन वीडियो में डॉ. थरूर के पुराने इंटरव्यू के फुटेज का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन उन पर ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) की मदद से ऐसी नकली आवाज़ लगाई गई है जो बिल्कुल उन्हीं की तरह सुनाई देती है. इस तकनीक के ज़रिए डॉ. थरूर के मुँह से वे बातें कहलवाई जा रही हैं, जो उन्होंने कभी नहीं कहीं.

पाकिस्तान की प्रशंसा वाले फर्जी दावों से थरूर आहत

इन डीपफेक वीडियो में सबसे ज़्यादा निशाना भारत-पाकिस्तान संबंधों और क्रिकेट डिप्लोमेसी को बनाया गया है. कुछ वीडियो में थरूर को कथित तौर पर पाकिस्तान की तारीफ करते हुए और मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए दिखाया गया है.

 

डॉ. थरूर ने इस पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि कई लोग इन ‘कन्विंसिंग’ लगने वाले झूठ पर भरोसा कर रहे हैं और उन विचारों के लिए उनकी आलोचना कर रहे हैं, जो उनके हैं ही नहीं. उन्होंने साफ किया कि मूल वीडियो में वे युद्ध समाप्ति और शांति पर ज़ोर दे रहे थे, जिसे डिजिटली बदलकर गलत रूप दे दिया गया है.

कैसे पहचानें असली और नकली?

भ्रामक सूचनाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए डॉ. शशि थरूर ने जनता से एक सरल नियम अपनाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अगर कोई बयान (वीडियो या लिखित) मेरे आधिकारिक X (ट्विटर) हैंडल पर या उस मूल मीडिया संस्थान के अकाउंट पर उपलब्ध नहीं है जिसने मेरा इंटरव्यू लिया था, तो उसे बिना सोचे-समझे ‘फेक न्यूज़’ मानें. उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे तकनीक के इस गलत इस्तेमाल के प्रति सतर्क रहें और बिना जांचे-परखे ऐसी सामग्री को आगे न बढ़ाएं.

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मीडिया चैनलों ने किया भंडाफोड़

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कई प्रमुख मीडिया चैनलों और फैक्ट-चेक टीमों ने भी जांच की है. पड़ताल में यह साबित हो चुका है कि इंटरनेट पर घूम रहे ये वीडियो पूरी तरह से ‘डिजिटली अल्टर’ (छेड़छाड़ किए हुए) हैं. जानकारों का मानना है कि चुनाव और महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक मुद्दों के समय ऐसे AI आधारित वीडियो समाज में भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं. डॉ. थरूर के कार्यालय ने भी स्पष्ट किया है कि तकनीक का ऐसा दुरुपयोग न केवल एक व्यक्ति की छवि खराब करता है, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा और विमर्श के लिए भी खतरा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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