रिपोर्ट: रमेश शंकर, समस्तीपुर
समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड अंतर्गत हरदासपुर इलाके से राहत वितरण के नाम पर प्रशासनिक और सामाजिक अव्यवस्था की ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जिसने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है. दरअसल गंगा नदी का जलस्तर घटने के बाद बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने का काम तो शुरू हुआ, लेकिन बांटने का तरीका इतना खौफनाक था कि लोग अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती नदी में कूदते नजर आए.
हरदासपुर इलाके में बाढ़ राहत बांटने आए लोग नाव पर सवार होकर राहत पैकेट पानी में फेंक रहे थे. बिस्किट, राशन और राहत सामग्री का पैकेट पाने के लिए छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक गंगा की उफनती और खतरनाक धारा में छलांग लगा रहे थे. पानी के तेज बहाव के बीच तैरकर पैकेट पकड़ने की यह होड़ किसी भी वक्त एक बड़े जल-समाधि हादसे में बदल सकती थी.
राहत सामग्री देखते ही राहत पाने की होड़ में दर्जनों बाढ़ पीड़ित पानी में तैरती एक खाली नाव पर एक साथ सवार हो गए. नाव की क्षमता से कई गुना ज्यादा लोग जब उस पर चढ़ गए, तो उफनती गंगा के बीच नाव बुरी तरह हिचकोले खाने लगी और असंतुलित हो गई.
यदि जरा सा भी संतुलन बिगड़ता या नाव पलटती, तो एक साथ दर्जनों लोगों की जलसमाधि पक्की थी.
राहत बांटने के इस अमानवीय और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को लेकर स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों में भारी आक्रोश है. सवाल उठ रहा है कि क्या बाढ़ पीड़ितों की लाचारी का इस तरह मजाक उड़ाया जाएगा? बिना किसी सुरक्षा घेरे, लाइफ जैकेट या व्यवस्थित टीम के इस तरह गंगा की बीच धारा में सामान फेंककर बांटना राहत नहीं बल्कि मौत को दावत देने जैसा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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