Sanjeev Singh Dhanbad: कोयलांचल की सत्ता और सियासत में अपनी धाक रखने वाले सिंह मेंशन की धमक ने एक बार फिर धनबाद को चर्चा में ला दिया. धनबाद नगर निगम चुनाव में मेयर की सीट पर झरिया के पूर्व विधायक और ठाकुर सूर्यदेव सिंह के बेटे संजीव सिंह ने एकतरफा जीत हासिल कर ये बता दिया कि यहां चाहे किसी की भी सरकार हो धनबाद में अगर किसी का सिक्का चलेगा तो वो सिंह मेंशन का ही.
संजीव सिंह का भाजपा से गहरा नाता रहा है. वो भाजपा के सिंबल पर ही विधायक बने थे, लेकिन मेयर चुनाव में जब उन्होंने भाजपा से अपनी उम्मीदवारी का समर्थन मांगा तो उन्हें मना कर दिया गया.
भाजपा से मना किए जाने के बाद संजीव सिंह ने अकेले चुनावी रण में उतरने का फैसला किया और 31,902 वोटों से अपने प्रतिद्वंद्वी को हराकर जीत हासिल की. संजीव सिंह की जीत के बाद एक बार फिर पूरे धनबाद में सिंह मेंशन और गैंग्स ऑफ वसेपुर की चर्चा तेज हो गई है.
धनबाद मेयर पद पर हुए चुनाव में संजीव सिंह ने पूर्व मेयर और झामुमो समर्थित प्रत्याशी चंद्रशेखर अग्रवाल को हराया. संजीव सिंह को जहां कुल 1,14,362 वोट मिले, तो वहीं चंद्रशेखर अग्रवाल को मात्र 82,460 वोटों से संतोष करना पड़ा. कांग्रेस के शमशेर आलम को 59,079 वोट मिले और वो तीसरे स्थान पर रहे. संजीव सिंह ने इस जीत के साथ कोयलांचल में एक इतिहास रच दिया. दरअसल धनबाद नगर निगम के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब किसी प्रत्याशी को 1 लाख से ज्यादा वोट मिले.
वहीं इस चुनाव में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला प्रदर्शन भाजपा का रहा. भाजपा के समर्थित प्रत्याशी संजीव कुमार को मात्र 57,895 वोट मिले. यहां भाजपा चौथे स्थान पर रही. जबकि इस मेयर की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए बीजेपी ने विधायकों और सांसदों की पूरी फौज उतार दी थी.
बता दें कि, संजीव सिंह धनबाद के चर्चित ‘सिंह मेंशन’ परिवार से आते हैं. उनके पिता ठाकुर सूर्यदेव सिंह ने सिंह मेंशन की नींव रखी थी. वो एक मजदूर नेता थे और झरिया से कई बार विधायक रहे थे. धनबाद की राजनीति में उनका एकछत्र राज चलता रहा. बॉलीवुड फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में रामाधीर सिंह का किरदार काफी हद तक सूर्यदेव सिंह से मिलता जुलता रहा.
संजीव सिंह की जीत ने झारखंड की राजनीति में एक बार फिर साबित कर दिया कि ‘सिंह मेंशन’ का दबदबा सिर्फ झरिया तक ही नहीं बल्कि पूरे धनबाद में है. जैसे-जैसे संजीव सिंह का कद बढ़ रहा है, सिंह मेंशन का दबदबा और धमक भी बढ़ती जा रही है. झरिया विधानसभा सीट पर आज भी सिंह मेंशन का ही कब्जा है. संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह यहां से बीजेपी विधायक हैं.
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सिंह मेंशन के वारिश और पूर्व विधायक संजीव सिंह करीब 8 सालों से जेल में थे. उन्हें नीरज सिंह हत्याकांड में कोर्ट से बरी होने के बाद संजीव ने एक बार फिर राजनीति में हाथ आजमाने का फैसला किया और जीत हासिल की. उनकी इस जीत में सबसे ज्यादा सहयोग युवाओं का रहा. युवाओं के बीच लोकप्रिय संजीव के प्रति लोगों की जबरदस्त सहानुभूति देखी जा रही थी.
-भारत एक्सप्रेस
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