कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट-पोस्ट ग्रेजुएट प्रवेश के लिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के काउंसलिंग फीस ढांचे को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट 17 जुलाई को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान CLAT कंसोर्टियम ने जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की, जिसके बाद कोर्ट ने कंसोर्टियम को समय देते हुए सुनवाई को टाल दिया है.
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आपने आवेदन किया था, तब ब्रोशर के अनुसार यह बात बहुत अच्छी तरह से ज्ञात थी. हाई कोर्ट ने कहा कि आप समाज के कमजोर वर्ग से नहीं है. यह याचिका अभ्यर्थी जतिन श्रीवास्तव की ओर से दायर की गई है. जो 20000 कि अतिरिक्त अपग्रेडेशन फीस के कारण दूसरी काउंसलिंग राउंड में भाग नहीं ले सकें. जबकि पहले ही 30 हजार की राशि जमा करानी पड़ती थी.
पिछली सुनवाई में जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कंसोर्टियम, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा था. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि काउंसलिंग में भाग लेने के लिए 30000 की राशि ली जा रही है, जो यूजीसी के विनियमों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लंघन है.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि मैं प्रति चरण भागीदारी के लिए 20000 रुपए का भुगतान किए बिना भाग नहीं ले सकता. पूरे देश में यह एकमात्र परीक्षा है जिसमें इतनी बड़ी राशि ली जाती है. सैकड़ों छात्र काउंसलिंग में भाग नहीं ले पा रहे हैं. मैं दूसरे चरण में शामिल नही हो पाया और तीसरे चरण 4 जुलाई को है. उन्होंने कोर्ट से भी आग्रह किया था कि फीस के बिना याचिकाकर्ता को काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति था.
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