लीगल

‘अब और पीड़ा नहीं…’, 13 साल से कोमा में पड़े हरीश को सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की अनुमति

Harish Rana passive euthanasia Supreme Court decision: देश के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 13 साल से कोमा में पड़े गाजियाबाद के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु देने की अनुमति दी है. बता दें कि यह देश का पहला मामला है जिसमें 2018 के कॉमन कॉज फैसले को कानूनी रूप से लागू करते हुए पैसिव यूथेनेशिया(इच्छामृत्यु) की मंजूरी दी गई है. SC के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की बेंच ने यह फैसला सुनाया है.

इच्छामृत्यु के मामले में कोर्ट क्या बोला?

जस्टिस पारदीवाला ने हेनरी डेविड थोरो के वाक्य को पढ़ते हुए कहा कि “ईश्वर किसी मनुष्य से यह नहीं पूछता कि वह जीवन को स्वीकार करता है या नहीं, जीवन उसे लेना ही पड़ता है.” उन्होंने कहा कि जब अदालतों के समक्ष यह प्रश्न आता है कि क्या किसी व्यक्ति को मरने का विकल्प चुनने का अधिकार है, तो विलियम शेक्सपियर का प्रसिद्ध कथन “To be, or not to be” यानी “जीना या न जीना” सामने आता है.

इसको लेकर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि मेडिकल बोर्ड (पहला और दूसरा बोर्ड) के फैसले एक जैसे आते हैं, तो इस स्थिति में अदालत आने की आवश्यकता नहीं है. कोर्ट ने देश के सभी राज्यों के हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वे सभी सीएमओ से रिपोर्ट तलब करें कि मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है या नहीं. कोर्ट ने चार सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है.

क्या है मामले की पूरी पृष्ठभूमि?

दरअसल हरीश राणा 2013 से क्वाड्रिप्लेजिया (Quadriplegia) से पीड़ित हैं, यानी 100% विकलांगता से ग्रस्त हैं. वे पिछले 12 वर्षों से विस्तर पर पड़े हैं. याचिका में कहा गया है कि हरीश एक जिंदा कंकाल की तरह 2013 से उसी विस्तर पर पड़े हुए हैं. माता-पिता का कहना है कि वे हमेशा उसके पास नहीं रहेंगे, तो उसकी देखभाल कौन करेगा.

इसको लेकर हरीश के पिता ने बताया कि उन्होंने एक साल तक 27,000 रुपये प्रति माह के हिसाब से नर्स रखी थी. फिलहाल हरीश का हर महीने का मेडिकल खर्च 20,000-25,000 रुपये है, जिसमें दवाइयां, खाना और बेडसोर का इलाज शामिल है. सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही है. अस्पताल में भर्ती होने पर परिवार को केंद्र सरकार की योजना से एक बार 50,000 रुपये की आर्थिक मदद मिली थी.

यह भी पढ़ें:  चाबहार पोर्ट पर हमला: ईरान और भारत के रिश्तों के बीच अमेरिका ने एक तीर से लगाए दो निशाने? भारत का था तगड़ा इनवेस्टमेंट

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट बनी आधार

नोएडा जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने कोर्ट को बताया था कि हरीश के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है. वह गंभीर बेड सोर से पीड़ित हैं, जिसका अर्थ है कि उनकी ठीक से देखभाल नहीं की जा रही थी. सीलबंद लिफाफे में दायर रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके ठीक होने की कोई संभावना नहीं है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

सेना में AI से गुगल में घमासान, सहूलियत या सुरक्षा पर खतरा? जानें मामला

Google DeepMind AI Military Controversy: पेंटागन और इजरायल के साथ सैन्य समझौतों के विरोध में…

15 minutes ago

2047 के विकसित भारत में खेल निभाएंगे अहम भूमिका, नई दिल्ली में आयोजित स्पोर्ट्स CSR समिट में बोले दिग्गज

नई दिल्ली के PHD हाउस में आयोजित स्पोर्ट्स CSR Summit में खेल राज्य मंत्री रक्षा…

51 minutes ago

हबीब-उर-रहमान को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, तीन साल से बंद आरोपी की जमानत याचिका ने ठुकराई

दिल्ली हाईकोर्ट ने सैन्य खुफिया जानकारी लीक करने के आरोपी हबीब-उर-रहमान की जमानत याचिका खारिज…

59 minutes ago

वंदे मातरम को राष्ट्रगान जैसा दर्जा देने की मांग, सुप्रीम कोर्ट 27 अक्टूबर को करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने और स्कूलों में इसे अनिवार्य…

1 hour ago

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; EWS और DG छात्रों को यूनिफॉर्म के लिए नकद सहायता देने की नीति को दी मंजूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने EWS और DG छात्रों को स्कूल यूनिफॉर्म के बदले नकद सहायता देने…

1 hour ago

मेगा मिलेनियम के ठिकानों पर ईडी की ताबड़तोड़ छापेमारी, करोड़ों की विदेशी और भारतीय करेंसी बरामद

ईडी ने मेगा मिलेनियम प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मुंबई, दिल्ली और महाराष्ट्र के ठिकानों पर…

1 hour ago