ममता काफले भट्ट केस
Mamta Kafle Bhatt Murder Case: एक घर, खून से सना बाथरूम, शव काटने के लिए इस्तेमाल हुई आरी और गायब लाश… लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह कि आखिर ममता को मारा किसने? अमेरिका के वर्जीनिया में सामने आई यह कहानी किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म की पटकथा जैसी है. पत्नी जुलाई 2024 से लापता है, घर में खून के निशान मिले हैं और पति खुद अदालत में कबूल कर चुका है कि उसने आरी से पत्नी के शव को काटने की कोशिश की थी. इसके बावजूद उसका दावा है कि उसने पत्नी की हत्या नहीं की, बल्कि उसे बेड के पास बेहोश पाया था.
अब दो साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन ममता का शव नहीं मिला. पति के बयानों ने इस केस को और उलझा दिया है. आखिर उस रात घर में क्या हुआ था? ममता की मौत कैसे हुई और उसका शव कहां गायब हो गया? इस रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है.
यह मामला भारतीय मूल की ममता काफले भट्ट की गुमशुदगी से जुड़ा है. ममता जुलाई 2024 से लापता हैं. उनके पति नरेश भट्ट पर फर्स्ट-डिग्री मर्डर, सबूत मिटाने और शव को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं. हालांकि, नरेश ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है.
वर्जीनिया के मनासास पार्क स्थित घर में 30 जुलाई 2024 की सुबह क्या हुआ था, इस बारे में नरेश ने सुनवाई के दौरान पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी. उसने दावा किया कि ममता की मौत आत्महत्या की वजह से हुई थी.
बेड के पास अचेत थी ममता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नरेश ने अदालत को बताया कि 29 जुलाई की रात करीब 8 बजे वह अपनी छोटी बेटी के साथ सोने चला गया था. उसे पता नहीं चला कि ममता कब ऊपर आईं. अगले दिन सुबह करीब 4 बजे जब वह बाथरूम जाने के लिए उठा तो उसे एक अजीब सी गंध महसूस हुई.
जब वह कमरे की तरफ लौटा तो ममता बेड के पास अचेत अवस्था में पड़ी थीं. नरेश के मुताबिक, उनके आसपास उल्टी के निशान थे. उल्टी में गोलियां दिखाई दे रही थीं और पास में कीटनाशक का एक खुला पैकेट भी पड़ा था. उसका दावा है कि ममता ने जहरीला कीटनाशक खा लिया था.
अदालत में नरेश से जब पूछा गया कि जब उसने अपनी पत्नी को बेहोश हालत में देखा तो तुरंत 911 पर फोन क्यों नहीं किया? आखिर उसने पुलिस या एंबुलेंस को सूचना देने में देरी क्यों की?
इस पर नरेश ने कहा,
मुझे नहीं पता कि मैंने ऐसा क्यों नहीं किया. मैंने कॉल करने की कोशिश की थी, लेकिन मैं बहुत डर गया था. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं. मैं बहुत ज्यादा घबरा गया था.
उसने दावा किया कि ममता को बचाने के लिए उसने करीब एक घंटे तक सीपीआर देने की कोशिश की. इसके बाद वह उन्हें बाथरूम में ले गया. जब उसे अहसास हुआ कि ममता की मौत हो चुकी है तो वह डर गया. इसके बाद उसके दिमाग में शव को ठिकाने लगाने के तरीके आने लगे.
नरेश ने अदालत में बताया कि पत्नी की मौत के बाद उसने शव को छिपाने के बारे में सोचना शुरू कर दिया था. शुरुआत में उसने ममता के शव को पोटोमैक नदी में फेंकने की योजना बनाई.
इसके बाद वह अपनी बेटी को आया के पास छोड़कर होम डिपो पहुंचा. उसने स्वीकार किया कि वहां जाने का मकसद शव को छिपाने के लिए जरूरी सामान तलाशना था.
नरेश ने यह भी दावा किया कि घर लौटने के बाद उसने केबल तार से फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में अपना इरादा बदल दिया. इसके बाद उसने शव को डस्टबिन में डालने की कोशिश की. लेकिन पूरा शरीर उसमें नहीं आ पाया. यहीं से इस मामले में एक और खौफनाक मोड़ सामने आया.
सुनवाई के दौरान नरेश ने अपने वकील के सवालों का जवाब देते हुए स्वीकार किया कि उसने ममता के शव को छोटा करने के लिए आरी का इस्तेमाल किया था.
उसने अदालत में बताया कि वह शव से पैर अलग करने की कोशिश कर रहा था. जब उससे पूछा गया कि उसने यह काम किस चीज से किया तो उसने कहा, “मेरे पास आरी थी, मैंने उसी का इस्तेमाल किया था.”
नरेश के मुताबिक, मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर महसूस करने के कारण उसने यह कोशिश बीच में ही छोड़ दी थी. उसने यह भी बताया कि उसने बाथरूम में शव को काटने की कोशिश की थी.
इस बयान के बाद जांचकर्ताओं को मिले साक्ष्य भी चर्चा में आ गए. जांच के दौरान घर के बाथरूम की टाइलों, शावर एरिया और दरवाजे के पास खून के निशान मिले थे. आरोप है कि इन निशानों को साफ करने की कोशिश की गई थी.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनवाई के दौरान नरेश के खिलाफ फॉरेंसिक सबूत, घर से मिले डीएनए सैंपल और रिश्तेदारों के बयान अदालत में पेश किए गए हैं.
गवाहों ने अदालत को बताया कि ममता अपनी छोटी बेटी को छोड़कर कभी खुद से दूर नहीं जा सकती थीं. इसके अलावा यह आरोप भी लगाया गया कि ममता और नरेश के रिश्ते अच्छे नहीं थे. नरेश पर ममता के साथ मारपीट करने के आरोप भी लगे हैं.
हालांकि, नरेश ने इन आरोपों को खारिज किया है. बचाव पक्ष का कहना है कि जांच एजेंसी के पास ऐसा कोई सीधा सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि नरेश ने ही ममता की हत्या की थी.
यही इस केस का सबसे पेचीदा पहलू है. एक तरफ घर से मिले साक्ष्य और शव को काटने की कोशिश का कबूलनामा है, तो दूसरी तरफ हत्या के आरोपों से इनकार और शव का अब तक बरामद नहीं होना है.
ममता को आखिरी बार 29 जुलाई 2024 को एक वीडियो कॉल के दौरान देखा गया था. इसके बाद वह कहां गईं, किसी को पता नहीं चला. जुलाई 2024 से शुरू हुई यह गुमशुदगी अब तक अनसुलझी है.
दो साल से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी ममता का शव बरामद नहीं हुआ है. नरेश पर हत्या, सबूत मिटाने और शव को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं, लेकिन उसने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है.
सुनवाई के दौरान नरेश भट्ट ने अपने बचपन और परिवार से जुड़ी बातें भी अदालत में बताईं. उसने कहा कि उसका जन्म नई दिल्ली में हुआ था. वह अपने माता-पिता और चाचा के साथ दो साल से अधिक समय तक दिल्ली में रहा था. इसके बाद उसका परिवार नेपाल लौट गया.
नरेश ने अपने बचपन की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि नेपाल में माओवादियों ने एक बार उसे बंधक बना लिया था और उसके साथ मारपीट की थी.
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फिलहाल ममता काफले भट्ट की गुमशुदगी का यह मामला कई सवाल छोड़ रहा है. अगर नरेश के दावे के मुताबिक ममता की मौत आत्महत्या से हुई थी, तो उसने पुलिस को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी? शव को छिपाने की कोशिश क्यों की? आरी से उसे काटने की नौबत क्यों आई? और सबसे बड़ा सवाल, ममता का शव आखिर कहां है? इन सवालों के जवाब इस मामले की सुनवाई और जांच से ही सामने आ सकेंगे.
-भारत एक्सप्रेस
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