पीएम मोदी के साथ सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शन्मुगरत्नम (फोटो: IANS)
सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शानमुगरत्नम (Tharman Shanmugaratnam) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख ध्रुव के रूप में भारत की उभरती भूमिका पर बात की. शनिवार(18 जनवरी) को राष्ट्रपति थर्मन ने कहा कि भारत के साथ संबंध सहयोग के एक नए आयाम पर पहुंच गए हैं.
अपने दो दिवसीय ओडिशा दौरे के अंत में मीडिया से बात करते हुए शानमुगरत्नम ने सिंगापुर के भविष्य के लिए भारत के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा, “भारत भू-राजनीतिक और आर्थिक रूप से बहुध्रुवीय दुनिया में अपने आप में एक ध्रुव बनने की आकांक्षा रखता है.” उन्होंने अगले दो दशकों में भारत की विकास संभावनाओं के बारे में भारत के जनसांख्यिकीय लाभ, विकास पथ, कुशल कार्यबल और निर्यात क्षमता का हवाला दिया. उन्होंने यह भी कहा कि सिंगापुर में हाल ही में हुए नेतृत्व परिवर्तन ने द्विपक्षीय संबंधों को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, जिससे संबंधों को मजबूत करने में निरंतरता सुनिश्चित हुई है.
पिछले साल सिंगापुर में 20 साल तक प्रधानमंत्री रहे ली सीन लूंग की जगह लॉरेंस वोंग ने ली थी. नेतृत्व परिवर्तन पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसने भारत के साथ संबंधों को “सकारात्मक के अलावा” किसी भी तरह से प्रभावित नहीं किया है. यह नेताओं की एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संबंधों का निरंतर विकास है. उन्होंने कहा, “हम सिंगापुर-भारत संबंधों को मजबूत करते रहेंगे और पिछले नेतृत्व के तहत जो किया गया था, वह नए नेतृत्व के तहत भी जारी रहेगा.”
आर्थिक सहयोग को संबोधित करते हुए, शानमुगरत्नम ने दोनों देशों के बीच हवाई सेवा समझौते को संशोधित करने की योजना के बारे में बताया, जिसे अंतिम बार 2005 में अपडेट किया गया था. उन्होंने कहा, “उड़ानें भरी हुई हैं और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाने के लिए समझौते का विस्तार करने की गुंजाइश है.” उन्होंने कहा कि भारतीय नेतृत्व के साथ अपनी बैठक में उन्होंने पाया कि दोनों पक्षों की ओर से उत्सुकता थी. सिंगापुर के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विमानन क्षेत्र के एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और जीर्णोद्धार) व्यवसाय में आशाजनक क्षमता दिखाता है. उन्होंने इस बात पर जोर डाला कि MRO में वैश्विक व्यवसाय वाली कुछ सिंगापुरी कंपनियां कैसे योगदान दे सकती हैं.
शानमुगरत्नम ने भारत और चीन दोनों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने एशिया के विकास, स्थिरता और स्थायित्व में इन साझेदारियों की भूमिका पर बात करते हुए कहा, “सिंगापुर की समृद्धि हमारे आसियान (ASEAN) पड़ोसियों, भारत और चीन के साथ घनिष्ठ जुड़ाव पर निर्भर करती है.” उन्होंने उभरते क्षेत्रों में चल रहे सहयोग, विशेष रूप से भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के संयुक्त विकास की ओर भी इशारा किया. शानमुगरत्नम ने कहा, “भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन के तहत स्थापित भारत की प्राथमिकताएं सिंगापुर की प्राथमिकताओं से बहुत अच्छी तरह मेल खाती हैं.”
उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों में भारतीय प्रवासियों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि सिंगापुर में भारतीय समुदाय में भारतीय मूल के कई पीढ़ियों के सिंगापुरी और हाल ही में आए अप्रवासी दोनों शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में अलग-अलग भूमिका निभा रहा है.
शानमुगरत्नम ने जोर देकर कहा कि द्विपक्षीय संबंध केवल भारतीय समुदाय तक सीमित नहीं हैं, उन्होंने गैर-भारतीयों सहित सभी सिंगापुरियों के भारत के साथ जुड़ने के महत्व पर ध्यान दिया. उन्होंने कहा, “गैर-भारतीय सिंगापुर वासियों को भारत में रुचि लेनी होगी और भारत की विविधता, इसके सभी अवसरों और इसकी सभी बनावट से उत्साहित होना होगा.”
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-भारत एक्सप्रेस
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