विश्लेषण

पेड़ के नीचे बैठते थे दलाल, आज सेकंडों में मैच होते हैं करोड़ों के आर्डर; जानिए BSE का अनोखा सफर

Origins of the Stock Market: भारतीय शेयर बाजार की कहानी एक साधारण वट वृक्ष के नीचे शुरू हुई थी. 9 जुलाई 1875 को मुंबई के दलाल स्ट्रीट पर प्रख्यात व्यवसायी प्रेमचंद रायचंद ने बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की औपचारिक स्थापना की. आज यह न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है.

एशिया का सबसे पुराना और भारत का सबसे बड़ा एक्सचेंज

मुंबई स्टॉक एक्सचेंज पर निवेशक और ट्रेडर शेयरों, बांडों तथा सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री करते हैं. वर्तमान में इसमें 6,000 से अधिक कंपनियां सूचीबद्ध हैं. दुनिया के दस सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंजों में शामिल बीएसई का अपना बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स है, जिसमें BSE पर सूचीबद्ध शीर्ष 30 कंपनियों को शामिल किया जाता है.

शेयर बाजार क्या है?

शेयर बाजार वह जगह है जहां कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं. अन्य बाजारों की तरह यहां भी खरीदार और विक्रेता मिलते हैं और मोल-भाव के बाद सौदा तय होता है.

पहले का दौर

आरंभ में शेयरों की खरीद-बिक्री मौखिक बोलियों से होती थी. दलाल मुंहजबानी सौदे तय करते थे. कोई लिखित दस्तावेज या कंप्यूटर नहीं होता था.

आज का युग

अब पूरा लेन-देन इलेक्ट्रॉनिक हो गया है. स्टॉक एक्सचेंज के नेटवर्क से जुड़े कंप्यूटर और इंटरनेट के/ माध्यम से ट्रेडिंग होती है. खरीदार और विक्रेता एक-दूसरे को जानते भी नहीं हैं. पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और सुरक्षित हो गई है.

मुंबई स्टॉक एक्सचेंज की पहुंच और महत्व

बीएसई महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में स्थित है, लेकिन इसकी पहुंच पूरे देश में फैली हुई है. यह 417 शहरों तक पहुंच रखता है. भारत के दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में बीएसई एक है, दूसरा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) है. बीएसई ने भारत को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार में मजबूत स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. यह न केवल घरेलू कंपनियों को पूंजी जुटाने का माध्यम बना है, बल्कि विदेशी निवेशकों के लिए भी विश्वसनीय प्लेटफॉर्म साबित हुआ है.

वट वृक्ष से दलाल स्ट्रीट तक

वट वृक्ष के नीचे शुरू हुई यह यात्रा आज दलाल स्ट्रीट के आधुनिक टावरों तक पहुंच चुकी है. जहां कभी कुछ दलाल मुंह से बोली लगाते थे, वहां आज दुनिया भर के निवेशकों के ऑर्डर सेकंडों में मैच होते हैं. बीएसई भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है. यह लाखों निवेशकों के सपनों, कंपनियों की वृद्धि और देश के आर्थिक विकास का प्रतीक है.

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-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

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