Salman Rushdie- The Eleventh Hour
आज विश्व साहित्य के महान हस्ताक्षर सलमान रुश्दी का जन्मदिन है. 1947 में मुंबई (तब बॉम्बे) में जन्मे रुश्दी ने अपने लेखन से वैश्विक स्तर पर चर्चा बटोरी है. ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रेन’ जैसी कृति के लिए बुकर पुरस्कार और ‘बेस्ट ऑफ द बुकर’ समेत अनेक सम्मान प्राप्त करने वाले रुश्दी का साहित्य हमेशा से कल्पनाशीलता, राजनीति, पहचान, इतिहास और मानवीय संवेदनाओं की गहन छानबीन रहा है.
उनकी हालिया रचना ‘आखिरी घड़ी’ (The Eleventh Hour) की, जो पेंगुइन स्वदेश द्वारा हिंदी में प्रकाशित हुई है. यह संग्रह रुश्दी की नवीनतम काल्पनिक रचना है, जिसमें पांच कहानियां (कथापंचक) शामिल हैं.
रुश्दी इस संग्रह में जीवन के अंतिम अध्याय ‘आखिरी घड़ी’ की ओर कल्पनाशक्ति का लेंस मोड़ते हैं. मृत्यु, विरासत, पहचान, क्रोध, शांति और विदाई जैसे गहन प्रश्नों पर यह पुस्तक विचार करती है. कहानियां भारत, इंग्लैंड और अमेरिका जैसे तीन देशों में फैली हुई हैं, जहां रुश्दी ने अपना जीवन और रचनात्मक यात्रा बिताई है.
रुश्दी स्वयं कहते हैं कि ये कहानियां मृत्यु, बॉम्बे, विदाई, कैम्ब्रिज, क्रोध, शांति और अमेरिका जैसे विषयों पर केंद्रित हैं. गॉया, काफ्का और बोश जैसे कलाकारों से प्रेरणा लेकर उन्होंने इन्हें एक संवाद में बुन दिया है. यह उनका Knife (चाकू) के बाद का नया फिक्शन है, जो Victory City के बाद आया है.
यह संग्रह मात्र कहानियों का संकलन नहीं, बल्कि जीवन की अंतिम सच्चाइयों की चौंकाने वाली पड़ताल है. रुश्दी पूछते हैं—क्या हम मृत्यु को स्वीकार करें या उससे विद्रोह? अपनी ‘आखिरी घड़ी’ को शांति से बिताएं या क्रोध में? यदि कहानी का अंत अज्ञात हो, तो जीवन में पूर्णता कैसे पाएं?
रुश्दी का जादुई यथार्थवाद, गहन अंतर्दृष्टि और असाधारण कथन-शैली यहां भी चरम पर है. हिंदी अनुवाद के माध्यम से भारतीय पाठक इस कृति को और करीब से महसूस कर सकते हैं.
सलमान रुश्दी का जन्मदिन उनके अमर साहित्य की याद दिलाता है, जो सदैव स्वतंत्रता, साहस और कल्पना का प्रतीक रहा. ‘आखिरी घड़ी’ न सिर्फ उनकी रचनात्मकता का नया अध्याय है, बल्कि पाठकों को जीवन की नाजुकता और सुंदरता पर चिंतन करने का अवसर भी प्रदान करती है.
-भारत एक्सप्रेस
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