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‘तैयारी के लिए नहीं मिला पर्याप्त समय’; 1672 नीट परीक्षार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा, जानें अदालत ने क्या कहा?

1672 नीट उम्मीदवारों की ओर से दायर उस याचिका पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है, जिसमें 21 जून को होने वाली नीट यूजी परीक्षा को टालने की मांग की गई थी. सीजेआई (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस बी. मोहना की बेंच ने कहा कि नीट यूजी मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ कर रही है, वही बेंच इस मामले में सुनवाई करेगी.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील आदिल अहमद ने कहा कि पेपर लीक की खबरों की वजह से छात्र बहुत ज्यादा दबाव में हैं. कल ही दिल्ली हाई कोर्ट में भी कहा गया था कि पेपर लीक हुए हैं. छात्र अपना एडमिट कार्ड तक डाउनलोड नहीं कर पा रहे हैं. इस पर सीजेआई ने कहा कि इन सब चीजों के लिए न्यायिक मंचों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

तैयारी के लिए नहीं मिला समय

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 3 मई 2026 को आयोजित मूल परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला. उनका दावा है कि दोबारा परीक्षा की घोषणा से लाखों छात्रों पर मानसिक दबाव, अनिश्चितता और शैक्षणिक व्यवधान का असर पड़ा है.

तकनीकी दिक्कतों का भी जिक्र

दायर याचिका में कहा गया है कि कई छात्र परीक्षा के बाद अपनी तैयारी से अलग हो चुके थे और अन्य प्रवेश परीक्षाओं, सेमेस्टर परीक्षाओं तथा शैक्षणिक गतिविधियों में जुट गए थे. ऐसे में कम समय के भीतर दोबारा पूरे सिलेबस की तैयारी करना बेहद कठिन हो गया है. दायर याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि परीक्षा से जुड़ी कथित पेपर लीक, फर्जी सूचनाओं और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों ने परीक्षा प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर किया है.

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इसके साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के दौरान कई छात्रों को तकनीकी दिक्कतों, सर्वर एरर और वेबसाइट क्रैश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिससे परीक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया है कि देश के विभिन्न राज्यों से छात्रों की बड़ी संख्या ने तैयारी के लिए अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं.

अनुच्छेद 14 और 21 के उल्लंघन का उठाया गया सवाल

याचिकाकर्ताओं द्वारा दर्ज आपत्तियों में कहा गया है कि क्या 21 जून 2026 को दोबारा नीट आयोजित करने का फैसला छात्रों के अनुच्छेद 14 और 21 के अधिकारों का उल्लंघन करता है? क्या परीक्षा की निष्पक्षता के साथ-साथ सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर देना भी प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है?

गोपाल कृष्ण

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