अक्सर कहा जाता है कि जहां माइनिंग (Mining) होती है, वहां से प्रकृति रूठ जाती है. लेकिन छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक ऐसी शानदार खबर सामने आई है, जिसने इस मिथक को पूरी तरह से तोड़ दिया है. सरगुजा की एक वीरान कोयला खदान अब एक खूबसूरत और हरे-भरे जंगल में तब्दील हो चुकी है, और इस ‘ग्रीन मैजिक’ के पीछे है अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Adani Enterprises Ltd). कंपनी ने यहां बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाकर माइनिंग के बाद जमीन को दोबारा ‘जिंदा’ करने का एक शानदार ग्लोबल उदाहरण पेश किया है.
यह पूरा चमत्कार सरगुजा की पारसा ईस्ट और कांटा बासन (PEKB) खदान में हुआ है, जिसे अडानी एंटरप्राइजेज राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) के लिए ऑपरेट करती है. कंपनी ने यहाँ 568 हेक्टेयर जमीन पर 16 लाख से अधिक पेड़ और पौधे लगाए हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के तहत ‘हर काटे गए एक पेड़ के बदले 40 नए पेड़’ लगाए जा रहे हैं. साल, महुआ, तेंदू, अमलतास और सिद्धा जैसी स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं, जिनका ‘सर्वाइवल रेट’ (बचने की दर) शानदार 88% है.
अडानी एंटरप्राइजेज के इस इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन (पारिस्थितिक बहाली) की गूंज दिल्ली तक पहुंच गई है. केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर इस प्रोजेक्ट की जमकर तारीफ की है.
मंत्रालय ने लिखा- “कोयला निकालने के बाद खदान का सफर खत्म नहीं होता, बल्कि यहां से एक टिकाऊ बदलाव की शुरुआत होती है. PEKB खदान इसका एक शानदार उदाहरण है.” मंत्रालय ने साफ कहा कि यह खदान इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जिम्मेदार खनन और पर्यावरण संरक्षण एक साथ कैसे चल सकते हैं.
कंपनी की योजना यहीं रुकने की नहीं है. इस दशक के अंत तक यहाँ 40 लाख पेड़ लगाने का एक ‘महा-टारगेट’ सेट किया गया है. इसके लिए अडानी समूह ने 3.5 हेक्टेयर की एक विशाल नर्सरी तैयार की है, जिसमें 5 लाख पौधे सुरक्षित रखे गए हैं. इसके अलावा सरगुजा, कोरिया, बलरामपुर और सूरजपुर के वन प्रभागों में 4,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में वनीकरण किया जा रहा है. कंपनी ने वन्यजीव प्रबंधन और पर्यावरण उपायों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के पास 259 करोड़ रुपये से अधिक जमा भी कराए हैं.
यह सिर्फ पेड़ों को उगाने की कहानी नहीं है, बल्कि उस इलाके के समाज को भी साथ लेकर चलने का विजन है. अडानी नेचुरल रिसोर्सेज पर्यावरणीय पहलों के साथ-साथ खनन क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आजीविका विकास पर केंद्रित कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय समुदायों का भी लगातार समर्थन कर रही है. साफ है कि अडानी एंटरप्राइजेज ने दिखा दिया है कि अगर नीयत साफ हो, तो विकास और प्रकृति दोनों एक साथ फल-फूल सकते हैं.
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