बिजनेस

जमीन कम, बिजली ज्यादा! अडानी विंड ने मुंद्रा में लगाया देश का सबसे शक्तिशाली 5 MW पवन टरबाइन

Adani Wind Turbine: भारत का पवन ऊर्जा क्षेत्र अब तेजी से बड़े और ज्यादा क्षमता वाले टरबाइनों की ओर बढ़ रहा है, ताकि सीमित जमीन से अधिक बिजली उत्पादन किया जा सके. इसी कड़ी में अडानी विंड ने गुजरात के मुंद्रा में 5 मेगावाट (MW) क्षमता और 185 मीटर रोटर डायमीटर वाले एक प्रोटोटाइप टरबाइन का कमीशनिंग किया है, जो देश में नई तकनीक की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

इस टरबाइन में 91.2 मीटर लंबी ब्लेड लगी है और इसका रोटर डायमीटर 185 मीटर है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े रोटर डायमीटर वाले पवन टरबाइनों में शामिल हो गया है. करीब 26,600 वर्ग मीटर के स्वेप्ट एरिया के साथ यह टरबाइन कम और मध्यम हवा वाले क्षेत्रों में भी बेहतर ऊर्जा उत्पादन करने में सक्षम है.

बड़े टरबाइनों की ओर बढ़ता यह रुझान पवन ऊर्जा सेक्टर में एक बड़े बदलाव को दिखाता है. अधिक क्षमता और बड़े रोटर वाले टरबाइन एक ही इंस्टॉलेशन से ज्यादा बिजली पैदा करते हैं, जिससे परियोजनाओं की लागत-प्रभावशीलता बढ़ती है और जमीन का बेहतर इस्तेमाल संभव होता है.

5W मॉडल के जरिये पकड़ मजबूत की तैयारी

नए 5 MW मॉडल के जरिए अडानी विंड अब देशभर के लो और मिड विंड साइट्स पर अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में है. कंपनी के चार मौजूदा मॉडल पहले से ही नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की एप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स (ALMM) में शामिल हैं, जो भारत में पवन टरबाइन लगाने के लिए अनिवार्य सूची है. इस नए मॉडल को भी जल्द ही प्रमाणन मिलने और ALMM में शामिल होने की उम्मीद है.

2 अप्रैल 2026 को जारी MNRE की ताजा सूची के मुताबिक, देश में 15 पवन टरबाइन निर्माता स्वीकृत हैं. इनमें सबसे अधिक क्षमता वाले मॉडलों में वेनविंड रिफेक्स पावर का 5.3 MW टरबाइन, अडानी विंड का 5.2 MW प्लेटफॉर्म, एनविजन का 5 MW टरबाइन और SANY का 4 MW टरबाइन शामिल हैं, जो सेक्टर में बढ़ती उच्च क्षमता की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं.

4 सालों में भारत की क्षमता में 8 GW की बढ़ोतरी

भारत का पवन ऊर्जा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम भी तेजी से विस्तार कर रहा है. 2022 में जहां इसकी क्षमता करीब 12 गीगावाट (GW) थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 20 GW तक पहुंच गई है. इसमें नैसेल, ब्लेड, टावर और अन्य प्रमुख उपकरणों का उत्पादन शामिल है, जिससे भारत वैश्विक क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.

ब्लूमबर्गएनईएफ के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में वैश्विक पवन ऊर्जा इंस्टॉलेशन 169 GW के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 38 प्रतिशत ज्यादा है. चीन अभी भी इस क्षेत्र में अग्रणी है, लेकिन भारत चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है, जिसने अमेरिका और जर्मनी को पीछे छोड़ दिया है.

दुनिया में चौथे स्थान पर है भारत

वर्तमान में भारत कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर है, जहां करीब 55 GW क्षमता पहले से चालू है. वहीं, देश में पवन ऊर्जा की संभावित क्षमता 1,100 GW से अधिक आंकी गई है. ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल का अनुमान है कि यदि 2030 तक हर साल 15 GW इंस्टॉलेशन होता है, तो भारत वैश्विक मांग का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर सकता है.

इस 5 MW प्लेटफॉर्म को अडानी विंड की भारतीय इंजीनियरिंग टीमों और जर्मनी की कंपनी WindtoEnergy के सहयोग से विकसित किया गया है, जिसमें स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तकनीक तैयार की गई है.

अडानी विंड क्षमता को बढ़ाने पर कर रही कार्य

मुंद्रा में स्थापित यह प्रोटोटाइप कंपनी की बढ़ती उत्पादन क्षमता की दिशा में भी संकेत देता है. अडानी विंड अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 2.25 GW से बढ़ाकर 5 GW प्रति वर्ष करने की योजना पर काम कर रही है, और आगे चलकर इसे 10 GW तक ले जाने का लक्ष्य है.

कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. यूरोप को एंटी-आइसिंग तकनीक वाले ब्लेड का निर्यात शुरू किया जा चुका है, जबकि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे बाजारों में बातचीत जारी है.

ये भी पढ़ें- CCI ने अडानी समूह के खिलाफ मामला किया बंद, बिजली बाजार में ‘डोमिनेंस’ साबित नहीं

ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और रिसाइक्लेबल मटेरियल्स पर बढ़ते फोकस के साथ भारत का पवन ऊर्जा निर्माण क्षेत्र वैश्विक मानकों के करीब पहुंच रहा है. जैसे-जैसे टरबाइनों का आकार बढ़ रहा है, सेक्टर का ध्यान अब प्रति साइट अधिक उत्पादन, बेहतर विश्वसनीयता और लंबी अवधि के प्रदर्शन पर केंद्रित हो गया है.

मुंद्रा में 5 MW प्रोटोटाइप का कमीशनिंग इसी बदलाव का संकेत है, जहां भारत का पवन ऊर्जा क्षेत्र अधिक दक्ष और उच्च उत्पादन वाली तकनीकों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

Recent Posts

आसमान में तैनात होगा भारत का स्वदेशी ‘जासूस’, DRDO ने HAPS एयरशिप का किया कामयाब ट्रायल

DRDO ने 21 किमी की ऊंचाई पर 'हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम' (HAPS) का सफल परीक्षण…

5 minutes ago

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पीएम केविन रुड बोले- वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति मजबूत, पीएम मोदी के हुए मुरीद

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम केविन रुड ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के मन में पीएम…

47 minutes ago

योगी सरकार का सोलर कमाल: 2,942 मेगावाट पहुंची रूफटॉप क्षमता, ‘PM सूर्य घर योजना’ में उत्तर प्रदेश नंबर-1

उत्तर प्रदेश में 'प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना' से 2,942 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर लग…

55 minutes ago

SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA ब्लॉक का हल्लाबोल, पुलिस ने राहुल गांधी को हिरासत में लिया

चुनाव आयोग के काम करने के तरीके और वोटर लिस्ट के स्पेशल गहन रिवीजन यानी…

1 hour ago

‘पाकिस्तानी हों या बांग्लादेशी, बख्शे नहीं जाएंगे’ अमित शाह की नीति का असर, घाटी से 150 अवैध विदेशी बाहर

गृह मंत्री अमित शाह की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत जम्मू-कश्मीर से 150 अवैध बांग्लादेशी…

2 hours ago