India Manufacturing Growth
India Manufacturing Growth: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए भारत के भविष्य के विकास का एक व्यापक रोडमैप पेश किया. उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री संसाधनों की खोज, स्टार्टअप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल तकनीक आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति के प्रमुख स्तंभ होंगे. प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को नई तकनीकों और आत्मनिर्भर संसाधनों पर तेजी से आगे बढ़ना होगा.
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने देश के तेजी से विकसित हो रहे नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि आज भारत में 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं, जो न केवल नए व्यवसाय खड़े कर रहे हैं बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया पहल ने युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया है. नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपए के इनोवेशन फंड की भी घोषणा की है, जिसके माध्यम से नए विचारों, अनुसंधान और तकनीकी विकास को समर्थन दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि भारत को केवल दुनिया का बाजार नहीं बनना है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नवाचार केंद्र बनना है. उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक तकनीकों को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना चाहिए और देश को अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों, विशेष रूप से 6जी, में नेतृत्व करना चाहिए.
उन्होंने घोषणा की कि सरकार अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी स्किल्स का प्रशिक्षण देगी, ताकि भारतीय युवा वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें.
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया में क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर चर्चा हो रही है क्योंकि आधुनिक तकनीक का बड़ा हिस्सा इन खनिजों पर निर्भर करता है. उन्होंने बताया कि भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन शुरू किया है और केंद्रीय बजट में क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर की भी घोषणा की गई है. इसके तहत भारत विभिन्न देशों के साथ समझौते कर रहा है और वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र में भारत पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर निर्माण और डेटा सेंटर जैसी उभरती तकनीकों के कारण आने वाले समय में ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ने वाली है. उन्होंने कहा कि नई दुनिया को ऊर्जा के बिना चलाना संभव नहीं है और भारत को भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन बढ़ाना होगा.
ऊर्जा सुरक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी. उन्होंने बताया कि संसद द्वारा शांति अधिनियम पारित किए जाने के बाद इस क्षेत्र के लिए नए अवसर खुले हैं और भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
प्रधानमंत्री ने समुद्री संसाधनों की खोज को लेकर भी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि सरकार समुद्र के भीतर मौजूद खनिज और ऊर्जा संसाधनों की खोज के लिए तेजी से काम कर रही है. पिछले वर्ष घोषित ‘समुद्र मंथन’ पहल को गति देने के लिए हाल ही में 85,000 करोड़ रुपए आवंटित करने का निर्णय लिया गया है.
उन्होंने कहा कि पहले देश के लगभग 99 प्रतिशत तटीय क्षेत्रों को संसाधन खोज के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र मान लिया गया था, लेकिन अब सरकार इस सोच को बदलते हुए समुद्री क्षेत्रों की विशाल संभावनाओं का उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में पाइप्ड नेचुरल गैस की सुविधा केवल 70 शहरों तक सीमित थी, जबकि आज यह बढ़कर 700 शहरों तक पहुंच चुकी है. पहले जहां केवल 20 से 22 लाख परिवारों तक पाइप्ड गैस पहुंची थी, वहीं अब लगभग 1.75 करोड़ घरों तक यह सुविधा पहुंचाने का काम चल रहा है.
उन्होंने बताया कि करीब 12 वर्ष पहले भारत की सौर ऊर्जा क्षमता केवल 2 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावाट तक पहुंच चुकी है. उनके अनुसार, यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत के विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है. उनके अनुसार, देश में मोबाइल फोन निर्माण 35 गुना बढ़ा है, जबकि आधुनिक रेलवे कोचों का उत्पादन 21 गुना बढ़ चुका है. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भी सात गुना विस्तार दर्ज किया गया है, जिससे भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत हुई है.
उन्होंने बताया कि देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और उपभोक्ताओं की संख्या लगभग चार गुना बढ़ी है. इसी अवधि में पेटेंट की संख्या चार गुना हुई है, जबकि डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ चुके हैं, जो भारत के तेजी से डिजिटलीकरण को दर्शाता है.
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प्रधानमंत्री ने कहा कि स्किल इंडिया मिशन, राष्ट्रीय ड्रोन नीति, अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसी पहलों ने देश के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि नवाचार, तकनीक और आत्मनिर्भरता के सहारे भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा.
(IANS के इनपुट पर आधारित)
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