RBI ने FCNR (B) डिपॉजिट विंडो की बंद
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अपने विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक यानी FCNR (B) डिपॉजिट विंडो को बंद करने की तिथि को अचानक आगे बढ़ाने के फैसले ने बैंकिंग सेक्टर और बाजार के जानकारों को हिलाकर रख दिया है. यह हैरानी इसलिए और भी ज्यादा है क्योंकि केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कुछ दिन पहले ही इसके बिल्कुल उलट बयान दिया था.
अचानक हुए इस बदलाव ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आने वाले समय में नीतियां कैसी रहेंगी. बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर केंद्रीय बैंक ने समय सीमा बदलने से पहले यह साफ कर दिया होता कि निवेश की रफ्तार को देखकर योजना की समीक्षा की जाएगी तो बैंक और ग्राहक अपनी पैसों से जुड़ी योजनाएं बहुत बेहतर तरीके से बना पाते.
इस योजना के अचानक बंद होने से उन बैंकों और बाजार के लोगों को बड़ा झटका लगा है जो पुरानी तारीखों को ध्यान में रखकर अपने पैसे के लेनदेन और फंडिंग की तैयारी कर रहे थे. एक बड़े प्राइवेट बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने खुलकर बताया कि इस फैसले ने बाजार में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा कर दी है क्योंकि ग्राहक बहुत ज्यादा गुस्से में हैं. लोग अपने पैसों के आने-जाने यानी कैश फ्लो की प्लानिंग कर रहे थे और उनके पास ऐसा करने के लिए पूरा समय था, लेकिन इस अचानक हुए फैसले ने सब कुछ चौपट कर दिया है.
बैंकर्स का यह भी कहना है कि लोग इन डिपॉजिट पर मिलने वाले 6% ब्याज का फायदा उठा रहे थे लेकिन अब वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं. इतने कम समय में अचानक से इतना बड़ा पैसों का इंतजाम करना किसी के लिए भी बहुत मुश्किल काम है.
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इस अचानक लिए गए फैसले के पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को कहा था कि इस योजना को समय से पहले बंद करने या बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है. हालांकि इसके ठीक नौ दिन बाद ही केंद्रीय बैंक ने यह ऐलान कर दिया कि जो सुविधा 30 सितंबर तक चालू रहनी थी, वह अब सिर्फ एक तय समय तक ही FCNR (B) डिपॉजिट लेगी.
यह फैसला तब सामने आया जब बैंकों ने 13 अगस्त तक इस खास विंडो के जरिए भारी-भरकम रकम जुटा ली थी. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह यह हो सकती है कि जितना पैसा जुटाने का लक्ष्य रखा गया था, वह पहले ही पूरा हो चुका था.
भले ही इस जल्दबाजी में लिए गए फैसले के पीछे प्रशासनिक और आर्थिक कारण रहे हों लेकिन बातचीत में आई इस कमी का असर सिर्फ बाजार की सोच पर नहीं पड़ेगा. जिन बैंकों ने विदेश से पैसे जुटाने और एनआरआई ग्राहकों को लोन या लेवरेज देने की तैयारी की थी अब उनके पास अपने काम को समेटने के लिए मुश्किल से दो हफ्ते का वक्त बचा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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