रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पश्चिमी देशों द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात और यूरोप में रिफाइंड प्रोडक्ट्स के निर्यात पर लगाए गए नए प्रतिबंधों पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है. कंपनी ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि वह यूरोपीय संघ (ईयू), ब्रिटेन और अमेरिका के दिशानिर्देशों का पूर्ण पालन करेगी. रिलायंस वर्तमान में इन प्रतिबंधों के प्रभाव का आकलन कर रही है और रिफाइनरी परिचालन में आवश्यक बदलाव करेगी ताकि अनुपालन सुनिश्चित हो सके. प्रवक्ता ने जोर दिया कि हमने सदैव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है और नियामक ढांचे का बेदाग पालन किया है.
अमेरिकी वित्त विभाग ने 22 अक्टूबर को रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों (रोसनेफ्ट और ल्यूकऑयल) पर सख्त प्रतिबंध लगाए. इनके तहत अमेरिकी संस्थाओं और व्यक्तियों को इन कंपनियों के साथ कोई व्यापार करने से रोक दिया गया है. गैर-अमेरिकी कंपनियों को भी लेनदेन करने पर दंड का खतरा है. मौजूदा अनुबंधों को पूरा करने की अंतिम तिथि 21 नवंबर तय की गई है. भारत के लिए यह झटका इसलिए बड़ा है क्योंकि 2025 में रूस से औसतन 17 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात हुआ, जिसमें से 12 लाख बैरल सीधे रोसनेफ्ट और ल्यूकऑयल से आए. इनमें से अधिकांश खरीद रिलायंस और नायरा एनर्जी ने की थी.
रिलायंस के प्रवक्ता ने कहा कि हमने यूरोपियन यूनियन, यूनाइटेड किंगडम और यूनाइटेड स्टेट्स द्वारा रूस से कच्चे तेल के इंपोर्ट और यूरोप में रिफाइंड प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट पर हाल ही में लगाए गए प्रतिबंधों पर ध्यान दिया है. रिलायंस अभी नए कंप्लायंस ज़रूरतों सहित इसके असर का आकलन कर रहा है. हम यूरोप में रिफाइंड प्रोडक्ट्स के इंपोर्ट पर EU की गाइडलाइंस का पालन करेंगे. जब भी इस संबंध में भारत सरकार से कोई गाइडेंस मिलेगी, हमेशा की तरह हम उसका पूरी तरह से पालन करेंगे. रिलायंस ने हमेशा भारत की एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के उद्देश्यों के साथ खुद को जोड़ा है.
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उन्होंने कहा क कंपनी लागू प्रतिबंधों और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का पालन करने के अपने लंबे समय से चले आ रहे और बेदाग रिकॉर्ड को बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और कंप्लायंस ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रिफाइनरी ऑपरेशंस को एडजस्ट करेगी. जैसा कि इंडस्ट्री में आम बात है, सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट बदलते मार्केट और रेगुलेटरी स्थितियों को दिखाने के लिए बदलते रहते हैं. रिलायंस अपने सप्लायर्स के साथ संबंधों को बनाए रखते हुए इन स्थितियों से निपटेगा.
कंपनी ने स्पष्ट किया कि सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स और बाजार-नियामक परिस्थितियां बदलती रहती हैं, जो ऊर्जा उद्योग में सामान्य है. रिलायंस अपने सप्लायर्स के साथ संबंध बनाए रखते हुए वैकल्पिक स्रोतों से कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी. उसकी विविधीकृत खरीद रणनीति घरेलू और निर्यात जरूरतों को पूरा करने में स्थिरता बनाए रखेगी. कंपनी को भरोसा है कि ये बदलाव उसकी रिफाइनरी की विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता पर असर नहीं डालेंगे.
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