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GST राहत की उम्मीदों से भारतीय शेयर बाजार में उछाल, निफ्टी-सेंसेक्स में भी जोरदार तेजी

Stock Market Today: वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही में बेहतर आय और जीएसटी को तर्कसंगत बनाने और मौद्रिक नरमी के लाभों से प्रेरित वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही में बेहतर आय की उम्मीदों के चलते इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखी गई. ऑटो और आईटी शेयरों में तेजी के चलते बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स क्रमशः लगभग 1.32 प्रतिशत और 1.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया.

फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों, इंफोसिस की बायबैक घोषणा और टेक्नोलॉजी खर्च में सुधार को लेकर आशावाद के चलते आईटी सूचकांक में तेजी देखी गई. निफ्टी 373 अंक बढ़कर एक बुलिश कैंडल बना रहा है. विश्लेषकों ने कहा कि वीकली चार्ट पर सूचकांक ने सिमेट्रिकल ट्रायंगल पैटर्न को तोड़ दिया है, जो आगे और तेजी की संभावना का संकेत देता है.

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के अनुसार, ‘निफ्टी ने 25,100 के स्तर से ऊपर बने रहकर 25,114 पर बंद होकर मजबूती का प्रदर्शन किया. यह अपने प्रमुख ईएमए स्तरों से ऊपर कारोबार करना जारी रखे हुए है, जो तेजी के रुझान को दर्शाता है. तत्काल प्रतिरोध स्तर 25,160 और उसके बाद 25,250 और 25,500 क्षेत्र हैं.तत्काल समर्थन 24,900 और फिर 25,000 पर दिखाई देता है.’

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि ‘आईटी सेक्टर के विपरीत, उपभोक्ता-केंद्रित क्षेत्र जैसे ऑटो और एफएमसीजी में तेजी आई है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि जीएसटी में कटौती से घरेलू खपत बढ़ेगी और मांग में सुधार में मदद मिलेगी.’

महंगाई और विदेशी निवेश निकासी का असर

घरेलू उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि दर्ज की गई और निरंतर विदेशी निकासी ने रुपए पर दबाव डाला. वैश्विक व्यापार तनावों के बीच मजबूत सुरक्षित निवेश मांग के कारण सोना नए उच्च स्तर पर पहुंच गया. इस सप्ताह, अगस्त में अमेरिकी खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 2.9 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी के बाद से उच्चतम दर है.

फूड और एनर्जी को छोड़कर, मुख्य मुद्रास्फीति 3.1 प्रतिशत पर स्थिर रही. बाजार का ध्यान रोजगार में वृद्धि में स्लोडाउन और फेड द्वारा ब्याज दरों में ढील दिए जाने की तीव्र संभावना पर केंद्रित रहा. 10-ईयर यूएस ट्रेजरी नोट घटकर 4 प्रतिशत रह गया, जो अप्रैल के बाद से सबसे निचला स्तर है.

कई विश्लेषकों ने लगातार उच्च मुद्रास्फीति के बीच फेड को दरें कम करने के प्रति आगाह किया है. उन्होंने अगस्त में संयुक्त राज्य अमेरिका की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति और श्रम बाजार की गतिशीलता में तीव्र गिरावट के कारण, उन्होंने अगले सप्ताह होने वाली एफओएमसी बैठक में 25 आधार अंकों की कटौती की उम्मीद जताई है और 2025 तक कुल मिलाकर लगभग तीन कटौती की उम्मीद है.

ये भी पढ़ें: मजबूत वैश्विक संकेतों के बीच हरे निशान में खुला भारतीय शेयर बाजार, मामूली बढ़त में रहे सेंसेक्स और निफ्टी

-भारत एक्सप्रेस 

निहारिका गुप्ता

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