केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार (7 फऱवरी) को नए आयकर विधेयक (Income-Tax Bill) को मंजूरी दे दी. इसे अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने की संभावना है. एक अधिकारी के अनुसार, विधेयक में धाराओं की संख्या में लगभग एक तिहाई की कमी किए जाने की उम्मीद है. अधिकारी ने कहा, “हमने कानून को सरल और अधिक संक्षिप्त बनाने के लिए धाराओं को 25-30 प्रतिशत तक कम करने का प्रयास किया है. हमने प्रावधान और स्पष्टीकरण हटा दिए हैं और शब्दों की संख्या आधी कर दी है.”
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि ऑथोरिटी को अत्यधिक शक्ति नहीं दी गई है. आय के परिमाणीकरण (Quantification) और दरों के निर्धारण से संबंधित मूल शक्ति संसद के पास बनी हुई है. प्रत्येक रुपया संसदीय अनुमोदन के बाद ही एकत्र किया जाएगा. यह कराधान (Taxation) का मूल सिद्धांत है और इसे कभी नहीं बदला जा सकता है. हालांकि, प्रक्रियात्मक विवरणों को नियमों में बदलकर कुछ प्रावधानों को और अधिक ठोस बनाया जा सकता है.
एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि नए बिल का फोकस सरलीकरण, स्पष्टता और समझने में आसानी पर है. इसका उद्देश्य स्पष्ट भाषा और छोटे वाक्यों का उपयोग करना है, साथ ही जटिल और अनावश्यक स्पष्टीकरण को समाप्त करना है. कर विभाग चाहता है कि विधेयक पर सार्वजनिक परामर्श हो, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो और करदाताओं, कारोबारियों और विशेषज्ञों से फीडबैक लिया जा सके.
पहले अधिकारी ने बताया, “हितधारकों से परामर्श करने से भविष्य में अस्पष्टता या कानूनी विवादों की संभावना कम हो जाती है, जिससे नई कर व्यवस्था में आसान बदलाव सुनिश्चित होता है.” बजट के एक दिन बाद बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए गए इंटरव्यू में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि संसद में पेश किए जाने के बाद विधेयक को वित्त संबंधी स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा. स्थायी समिति परामर्श प्रक्रिया शुरू करेगी.
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा था कि विधेयक का उद्देश्य वर्तमान में भाषा में जटिला के कारण अलग-अलग कोर्ट द्वारा व्याख्या से संबंधित मुद्दों को हल करना भी है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के पूर्व सदस्य और PwC के सलाहकार अखिलेश रंजन ने विधेयक पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नए विधेयक में एक ही मुद्दे से निपटने वाले खंडों को शामिल किए जाने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा कि इस बिल से क्रॉस-रेफरेंसिंग से बचने की भी संभावना है. इसके अलावा इसके हर एक चैप्टर की अपनी परिभाषाएं हो सकती हैं. साथ ही कानून अधिक समझने योग्य और अनुपालन में आसान हो जाएगा.
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, टैक्स प्रशासन में अपने अनुभव के साथ 100 से अधिक अधिकारियों ने नए विधेयक के ड्राफ्ट में योगदान दिया. टैक्स कानून जटिल हैं और उन्हें सरल बनाना एक बहुत बड़ा काम था. अगर यह विधेयक इतने कम समय में सही मायने में आसानी हासिल कर लेता है, तो इसका श्रेय सरकार को जाता है.
ऐसा माना जाता है कि आम लोगों के लिए कर कानूनों को सरल बनाने के लिए मजबूत राजनीतिक दबाव के कारण ड्राफ्ट को केवल छह महीने में पूरा करना पड़ा. जानकार अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली के बाहर से कई अधिकारियों को केवल इस कार्य के लिए राजधानी में स्थानांतरित किया गया था, जो इसको को पूरा करने के लिए देर रात तक काम कर रहे थे.
संसद द्वारा महत्वपूर्ण शक्तियों को अपने पास रखने की संभावना है, लेकिन कर अधिकारियों को कोई अतिरिक्त अधिकार नहीं दिया जाएगा. विधेयक का उद्देश्य करदाताओं को नियमों को आसानी से समझने और उनका पालन करने में मदद करने के लिए स्पष्ट भाषा का उपयोग करना है. विधेयक कर कानूनों को समझने और उनका अनुपालन करने में आसान बनाने के लिए संबंधित धाराओं को संयोजित करना है.
-भारत एक्सप्रेस
सज्जाद जहीर उर्दू साहित्य के प्रमुख लेखक, प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक और कम्युनिस्ट विचारक…
UPSC Mains Result 2026 Civil Services exam interview: UPSC ने सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2026…
Bihar News: दरभंगा के सकतपुर थाना क्षेत्र में गश्त के दौरान एएसआई रणधीर कुमार को…
UP Assembly Election 2027: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अखिलेश यादव के चुनाव नहीं…
Film Notice Pankaj Jha Bharat Express podcast Arun Govil: फिल्म 'नोटिस' में 39 साल बाद…
दिल्ली पुलिस की हेड कॉन्स्टेबल चंचल ने एक साल के भीतर 119 लापता बच्चों और…