Science Journal Study: कैंसर आज के समय की सबसे चुनौतीपूर्ण बीमारियों में से एक है, जो शरीर के लगभग हर अंग को अपनी चपेट में ले सकती है. हाल ही में प्रतिष्ठित जर्नल ‘साइंस’ में प्रकाशित एक नए शोध ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि दिल की निरंतर धड़कन और उससे उत्पन्न होने वाला मैकेनिकल दबाव (Mechanical Pressure) ही वह ‘सुरक्षा कवच’ है, जो कैंसर कोशिकाओं को वहां पनपने से रोकता है.
प्रतिष्ठित जर्नल साइंस में प्रकाशित एक नई स्टडी ने इस सवाल का दिलचस्प जवाब दिया है. शोध के मुताबिक, दिल की धड़कन से पैदा होने वाला मैकेनिकल दबाव कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने को रोक सकता है- कम से कम चूहों पर किए गए प्रयोगों में ऐसा देखा गया है.
वैज्ञानिकों के अनुसार, शरीर के लगभग हर अंग में ट्यूमर विकसित हो सकता है, लेकिन दिल में कैंसर के मामले बेहद दुर्लभ होते हैं. इंसानों में प्राथमिक कार्डियक ट्यूमर (जो सीधे दिल में शुरू होते हैं) 1 फीसदी से भी कम पोस्टमॉर्टम में पाए गए हैं. वहीं, सेकेंडरी ट्यूमर (जो शरीर के अन्य हिस्सों से फैलकर दिल तक पहुंचते हैं) करीब 18 फीसदी मामलों में देखे गए हैं.
अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि दिल में कैंसर इतना कम क्यों होता है. जेम्स चोंग, जो यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी से जुड़े हैं, कहते हैं कि यह नई स्टडी इस रहस्य को समझाने के लिए “मजबूत और विश्वसनीय आधार” प्रस्तुत करती है.
इस शोध का नेतृत्व सेरेना जाखिना और उनकी टीम ने ‘यूनिवर्सिटी ऑफ ट्री-ए-स्ते’ (इटली स्थित) में किया. वैज्ञानिकों ने जेनेटिकली मॉडिफाइड चूहों पर एक अनोखा प्रयोग किया. उन्होंने चूहों के शरीर के बाहर-गर्दन पर-एक अतिरिक्त दिल प्रत्यारोपित किया. यह ‘बाहरी’ दिल खून की सप्लाई तो प्राप्त कर रहा था, लेकिन धड़क नहीं रहा था.
इसके बाद शोधकर्ताओं ने इन चूहों के ‘नॉर्मल’ (धड़कते) दिल और ‘बाहरी’ (स्थिर) दिल दोनों में कैंसर कोशिकाएं इंजेक्ट कीं. दो हफ्तों के भीतर, स्थिर दिल में कैंसर कोशिकाएं तेजी से बढ़ीं और ज्यादातर स्वस्थ कोशिकाओं की जगह ले ली. इसके विपरीत, धड़कते दिल में केवल लगभग 20 फीसदी ऊतकों पर ही कैंसर का असर हुआ.
शोध यहीं नहीं रुका. वैज्ञानिकों ने लैब में चूहे के दिल की कोशिकाओं से कृत्रिम हृदय ऊतक (इंजीनियर्ड हार्ट टिश्यू) भी तैयार किया. इस ऊतक को कैल्शियम आयन के संपर्क में लाने पर ही वह धड़कता था- ठीक वैसे ही जैसे शरीर के भीतर दिल काम करता है.
जब इस ऊतक में फेफड़ों के कैंसर की कोशिकाएं डाली गईं, तो पाया गया कि स्थिर (नॉन-बीटिंग) ऊतक में कैंसर तेजी से फैलता है और अधिक जगह घेर लेता है. वहीं, धड़कते ऊतक में कैंसर कोशिकाएं सीमित रहीं और केवल बाहरी परतों में क्लस्टर बनाकर रह गईं.
यह शोध इस ओर इशारा करता है कि दिल की लगातार गति और उससे उत्पन्न दबाव कैंसर कोशिकाओं के लिए प्रतिकूल वातावरण बनाते हैं, जिससे उनका विकास रुक जाता है या धीमा पड़ जाता है.
हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अध्ययन अभी शुरुआती चरण में है और इसे सीधे इंसानों पर लागू करने से पहले और शोध की जरूरत है. फिर भी, यह खोज भविष्य में कैंसर उपचार के नए तरीकों का रास्ता खोल सकती है- जहां मैकेनिकल फोर्स या टिश्यू मूवमेंट का इस्तेमाल कर कैंसर की वृद्धि को नियंत्रित किया जा सके.
यह एक अत्यंत दिलचस्प वैज्ञानिक जानकारी है. हृदय की धड़कन और कैंसर प्रतिरोधक क्षमता के बीच का यह संबंध भविष्य के चिकित्सा विज्ञान के लिए नए द्वार खोल सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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