एजुकेशन

किताबें बेचकर पूरी की पढ़ाई, परिवार ने भी किया विरोध; अब बिहार की बेटी ने UPSC क्रैक कर रचा इतिहास

Priya Kumari UPSC: संघर्ष की राह पर चलकर ही सफलता की असली चमक मिलती है, और इस बात को सच साबित कर दिखाया है बिहार की रहने वाली प्रिया कुमारी ने. कॉर्पोरेट सेक्टर की चकाचौंध को छोड़कर सिविल सर्विसेज का सपना देखने वाली प्रिया की कहानी हर उस लड़की के लिए एक बड़ी मिसाल है, जो तमाम मुश्किलों के बीच आसमान छूने की चाह रखती है. लगातार चार बार असफल होने और शादी के दबाव झेलने के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आखिरकार अपनी मेहनत के दम पर यूपीएससी (UPSC CSE 2025) में 232वीं रैंक हासिल कर अफसर बनने का अपना सपना पूरा कर ही लिया.

सरकारी स्कूल से UPSC तक का सफर

बिहार के पटना के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाली प्रिया की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई सरकारी स्कूल में ही हुई थी. वह अपने गांव की पहली ऐसी लड़की थीं, जिन्होंने आगे चलकर प्राइवेट स्कूल में दाखिला लिया. पढ़ाई में हमेशा से होशियार रहीं प्रिया ने 12वीं की परीक्षा में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. इसके बाद उन्होंने कंपनी सेक्रेटरी (CS) कोर्स में ऑल इंडिया रैंक-21 लाकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया. इसी सफलता ने उन्हें आगे की बड़ी उड़ान भरने का हौसला दिया.

रूढ़िवादी सोच बनी सबसे बड़ी चुनौती

प्रिया के लिए यूपीएससी का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. उनके घर में रूढ़िवादी सोच का माहौल था, जहां दादाजी और पिता चाहते थे कि वह शादी करके अपनी जिंदगी में ‘सेटल’ हो जाएं. लेकिन प्रिया अपने सपनों के प्रति पूरी तरह अडिग थीं. उन्होंने साफ कह दिया कि वे अपनी नौकरी की कमाई से ही अपनी पढ़ाई का खर्च उठाएंगी. मां और भाई के पूरे सपोर्ट के कारण वह अपने पिता को मनाने में कामयाब रहीं और अपना पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई पर रखा.

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सिर्फ 25-30 किताबें चुनीं

शुरुआत में लगातार असफलता मिलने का कारण तैयारी में कुछ कमियां थीं. साल 2023 और 2024 के प्रयासों में वह महज 1 या 2 अंकों से प्रीलिम्स में चूक गई थीं. इसके बाद उन्होंने एक बहुत ही साहसी फैसला लिया. उन्होंने अपनी ढेर सारी पुरानी किताबें कबाड़ में बेच दीं क्योंकि उन्हें अहसास हुआ कि ज्यादा स्टडी मटेरियल सिरदर्द बन रहा है. उन्होंने सिर्फ 25 से 30 चुनिंदा कोर बुक्स पर फोकस किया, सोशियोलॉजी को अपना ऑप्शनल बनाया और स्टैटिक पोर्शन मजबूत किया.

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-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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