BALIKA VADHU CAST THEN AND NOW: भारतीय टेलीविजन के इतिहास में जब भी सामाजिक बदलाव लाने वाले धारावाहिकों की बात होती है, तो कलर्स टीवी के कल्ट शो ‘बालिका वधू’ (कच्ची उम्र के पक्के रिश्ते) का नाम सबसे ऊपर आता है. राजस्थान की पृष्ठभूमि में बाल विवाह के दर्द को बयां करने वाले इस धारावाहिक के किरदारों ने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी थी. आज करीब 18 साल बाद भी दर्शक यह जानने को उत्सुक रहते हैं कि इस शो के ‘बींदणी’ और ‘छोरे’ यानी मुख्य कलाकार आज कहां और किस हाल में हैं.
अविका गौर (छोटी आनंदी): नन्हीं आनंदी का किरदार निभाकर घर-घर में लोकप्रिय हुईं अविका गौर आज 29 वर्ष की हो चुकी हैं और अब वे साउथ सिनेमा (तेलुगु फिल्मों) की जानी-मानी अभिनेत्री और निर्माता बन चुकी हैं.
अविनाश मुखर्जी (छोटा जगिया): छोटे जगिया की भूमिका निभाने वाले अविनाश मुखर्जी आज टेलीविजन इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और कई लोकप्रिय धारावाहिकों व वेब प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे हैं.
शशांक व्यास (बड़ा जगिया): बड़े जगिया के रूप में पहचान बनाने वाले शशांक व्यास ने कई टीवी शोज में काम किया और वे सोशल मीडिया व ट्रैवलिंग के जरिए अपने प्रशंसकों से जुड़े रहते हैं.
नेहा मारदा (गहना) व रूप दुर्गापाल (सांची): गहना का संजीदा किरदार निभाने वाली नेहा मारदा अब डिजिटल कंटेंट और मातृत्व पर ध्यान दे रही हैं, जबकि सांची बनीं रूप दुर्गापाल ओटीटी और थिएटर प्रोजेक्ट्स में सक्रिय हैं.
इस धारावाहिक से जुड़ी कुछ बेहद दर्दनाक यादें भी हैं, जिसने पूरी इंडस्ट्री को झकझोर कर रख दिया:
प्रत्यूषा बनर्जी (बड़ी आनंदी): बड़ी आनंदी के रूप में पूरे देश का दिल जीतने वाली प्रत्यूषा बनर्जी ने 1 अप्रैल 2016 को महज 24 साल की उम्र में मुंबई स्थित अपने फ्लैट में सुसाइड (आत्महत्या) कर लिया था. उनकी अचानक मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था.
सिद्धार्थ शुक्ला (शिवराज शेखर – शिव): कलेक्टर बाबू शिवराज शेखर का किरदार निभाकर राष्ट्रीय क्रश बने सिद्धार्थ शुक्ला का 2 सितंबर 2021 को महज 40 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया.
सुरेखा सीकरी (कल्याणी देवी – दादी सा): अपने कड़क मिजाज और कालजयी डायलॉग्स से शो की रीढ़ बनीं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री सुरेखा सीकरी ने 16 जुलाई 2021 को 75 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के चलते दुनिया को अलविदा कह दिया था.
प्रसारण वर्ष और थीम: ‘बालिका वधू’ की शुरुआत 21 जुलाई 2008 को नवोदित चैनल ‘कलर्स’ पर हुई थी. उस दौर में जब सास-बहू के ड्रामे हावी थे, तब इस शो ने राजस्थान के थार रेगिस्तान के सामंती समाज में बाल विवाह, बेमेल विवाह, विधवा विवाह, महिला शिक्षा और रूढ़िवादिता जैसे ज्वलंत सामाजिक मुद्दों पर सीधा प्रहार किया.
कथानक का भावनात्मक जुड़ाव: मासूम आनंदी का खिलौनों की उम्र में ससुराल आना, दादी सा की सख्त परंपराएं और बाद में आनंदी का संघर्ष कर आत्मनिर्भर बनना—इन भावनात्मक पहलुओं ने इसे हर भारतीय परिवार से जोड़ दिया.
रिकॉर्ड तोड़ TRP: इस शो ने भारतीय टीवी पर टीआरपी के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे. अपने पीक दौर (2008-2010) में इस शो की TRP रेटिंग 8.0 से 10.0 के पार दर्ज की गई थी, जिसने उस समय स्टार प्लस के दशकों पुराने दबदबे को खत्म कर कलर्स को देश का नंबर-1 एंटरटेनमेंट चैनल बना दिया था. 2,245 से अधिक कड़ियों तक चलने वाला यह धारावाहिक आज भी भारतीय टेलीविजन का एक अमर अध्याय माना जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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