AI और फर्जी वीडियो के जरिए भारत की छवि खराब करने की प्रतीकात्मक इमेज, PC-@chatgpt
Digital Propaganda Against India: इंटरनेट और सोशल मीडिया की आड़ में भारत की वैश्विक छवि को धूमिल करने की एक बेहद खतरनाक और सोची-समझी डिजिटल साजिश का खुलासा हुआ है. मशहूर कंटेंट क्रिएटर ‘अभि और नियो’ के हालिया वीडियो के बाद यह मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है. आरोप है कि भारत के दुश्मन और विदेशी ताकतें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भ्रामक वीडियो का इस्तेमाल करके देश के खिलाफ एक बड़ा ‘इंफॉर्मेशन वॉरफेयर’ (सूचना युद्ध) चला रही हैं.
इस प्रोपेगैंडा के जरिए दुनिया के सामने भारत की तस्वीर सिर्फ गंदगी, अव्यवस्था और असभ्यता से जोड़कर पेश की जा रही है, जो अब सीधे-सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा और भारतीयों के सम्मान से जुड़ चुका है.
वायरल हो रहे इस वीडियो में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया पर भारत की खराब इमेज दिखाने वाले ज्यादातर वीडियो फर्जी, AI-जनरेटेड या संदर्भ से काटकर बनाए गए हैं. इस नैरेटिव के तार पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी मुल्कों से जुड़े हैं, जहां बैठकर यह कंटेंट तैयार किया जाता है. इसमें चीन से AI तकनीक का सपोर्ट लिया जाता है और फिर इसे यूरोप तथा पश्चिमी देशों (Western Countries) में योजनाबद्ध तरीके से वायरल कराया जाता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक OSINT (ओपन सोर्स इंटेलिजेंस) इंवेस्टिगेटर के हवाले से खुलासा हुआ है कि ऑनलाइन नेटवर्क पहले इन फेक और एडिटेड वीडियो को आपस में सर्कुलेट करते हैं. जब किसी वीडियो की वायरल क्षमता पुख्ता हो जाती है, तो विदेशी बॉट अकाउंट्स के जरिए उसे करोड़ों लोगों तक पहुंचा दिया जाता है.
भारत के किसी छोटे से इलाके की एक खराब घटना, सड़क किनारे की गंदगी या किसी स्थानीय त्योहार के वीडियो को इस तरह पेश किया जाता है मानो पूरा भारत ऐसा ही हो. यह आलोचना नहीं, बल्कि नस्लीय नफरत और पूर्वाग्रह फैलाने का सुनियोजित एजेंडा है.
एक तरफ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, यूपीआई तकनीक से लेकर स्पेस सेक्टर और मेक इन इंडिया में नए कीर्तिमान रच रहा है. वहीं दूसरी तरफ, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम सनसनीखेज और नफरत फैलाने वाले कंटेंट को ज्यादा व्यूज और एंगेजमेंट के चक्कर में तेजी से प्रमोट करते हैं. जब किसी विदेशी यूजर के सामने बार-बार AI से बने फर्जी वीडियो आते हैं, तो उसकी सोच में भारतीयों के प्रति भेदभाव की भावना पैदा होती है, जिससे विदेशों में रह रहे भारतीयों के लिए खतरा पैदा हो सकता है.
बता दें कि डिजिटल दौर में लड़ाई अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि यह नैरेटिव और परसेप्शन (धारणा) की जंग बन चुकी है. इसमें सबसे बड़ी जिम्मेदारी भारतीय यूजर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की है. बिना जांच-पड़ताल किए किसी भी भ्रामक या देश की छवि खराब करने वाले वीडियो को आगे बढ़ाना इस साजिश में अनजाने में मदद करने जैसा है.
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अब वक्त आ गया है जब टेक कंपनियों को अपने एल्गोरिदम में सुधार करना होगा और नागरिकों को भी फेक न्यूज तथा AI-जनरेटेड प्रोपेगैंडा को पहचानकर उसे बेनकाब करना होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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