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Air Marshal Narmdeshwar Tiwari: भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख बने नर्मदेश्वर तिवारी, देखिए इनका प्रोफाइल

Air Marshal Narmdeshwar Tiwari: भारतीय वायुसेना को आज नया नेतृत्व मिला है. एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख) के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है. अपने तीन दशकों से अधिक के सैन्य करियर में एयर मार्शल तिवारी ने असाधारण योगदान दिया है और अब वे भारतीय वायुसेना की रणनीतिक योजनाओं और संचालन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

एयर मार्शल तिवारी की स्कूली शिक्षा देहरादून स्थित राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज (RIMC) में हुई. इसके बाद उन्होंने खडकवासला स्थित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से प्रशिक्षण प्राप्त किया, जहां से वे जून 1985 में राष्ट्रपति स्वर्ण पदक विजेता के रूप में पास हुए. उन्होंने 7 जून 1986 को भारतीय वायुसेना में एक फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया.

अपने 3,600 घंटे से अधिक के उड़ान अनुभव के साथ एयर मार्शल तिवारी एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं. वे अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज से स्नातक हैं. उन्होंने भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट स्कूल और वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में डाइरेक्टिंग स्टाफ के रूप में भी सेवाएं दी हैं.

कारगिल युद्ध और एलसीए प्रोजेक्ट में भूमिका

एयर मार्शल तिवारी को हथियार प्रणालियों और ऑपरेशनल टेस्टिंग में विशेषज्ञता हासिल है. 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने ‘लाइटनिंग’ लेजर डेजिग्नेशन पॉड को ऑपरेशनल करने में अहम भूमिका निभाई थी. इसके अलावा, उन्होंने दो बार—2006 से 2009 और फिर 2018-19 में—एलसीए (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के उड़ान परीक्षणों में भागीदारी की. उस समय वह नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर में प्रोजेक्ट डायरेक्टर (फ्लाइट टेस्ट) थे और विमान को अंतिम ऑपरेशनल क्लीयरेंस दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

2013 से 2016 के दौरान वह पेरिस में भारत के एयर अताशे के रूप में नियुक्त रहे. इसके अतिरिक्त, उन्होंने वायुसेना मुख्यालय में डिप्टी चीफ ऑफ द एयर स्टाफ की जिम्मेदारी भी संभाली. वाइस चीफ बनने से पहले वे दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे.

एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी को उनकी विशिष्ट सेवा के लिए कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें वर्ष 2008 में वायुसेना मेडल, 2022 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और हाल ही में 2025 में परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) शामिल है.


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-भारत एक्सप्रेस

Prashant Rai

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