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Ajab Gajab: भूतिया कुर्सी पर जो भी बैठा मारा गया, क्या है शापित कुर्सी के पीछे का सच? कहानी सुनकर चौंक जाएंगे आप

यह दुनिया अलग-अलग रहस्यमयी वस्तुओं से भरी पड़ी है. उन वस्तुओं से जुड़ी कई अलग-अलग कहानियां हैं जो लोगों को हैरान कर देती हैं. आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं. इस कहानी में हम एक कुर्सी के बारे में बात करेंगे जिसकी कहानी काफी दिलचस्प है. कहा जाता है कि जो भी इस कुर्सी पर बैठा, उसकी मौत हो गई.

यह कुर्सी इंग्लैंड के एक म्युजियम में रखी है. अब आप इस कुर्सी के डर का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि म्युजियम में कुर्सी को कई फीट ऊपर लटकाया गया है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कोई इस पर बैठ न सके. यही वजह है कि इस कुर्सी की चर्चा अलग-अलग देशों में होती है. लोग इस कुर्सी को मौत की कुर्सी कहने लगे हैं. मौत की कुर्सी के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं. ये कहानियां आपको हैरान कर देंगी. जितना आप इन्हें सुनेंगे, उतना ही चौंकेंगे. आइए हम आपको एक-एक करके इस शापित कुर्सी के बारे में बताते हैं.

किसकी थी कुर्सी?

आप सोच रहे होंगे कि ये कुर्सी कहां से आई और किसकी थी? तो चलिए हम आपको बताते हैं. ये कुर्सी थॉमस बुस्बी नाम के एक व्यक्ति की थी. थॉमस को यह कुर्सी बहुत पसंद थी. एक कहानी के अनुसार एक दिन थॉमस के ससुर उस कुर्सी पर बैठ गए. जिससे थॉमस आगबबूला हो गया और उसने अपने ससुर की हत्या कर दी. जिसके बाद अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई और उसे फांसी पर लटका दिया गया.

कहा जाता है कि फांसी पर चढ़ने से पहले थॉमस ने श्राप दिया था कि जो भी इस कुर्सी पर बैठने की कोशिश करेगा उसकी मौत हो जाएगी. परिवार के साथ-साथ आसपास के लोगों ने भी थॉमस की बातों को गंभीरता से नहीं लिया और उस कुर्सी पर बैठना शुरू कर दिया. जो भी उस कुर्सी पर बैठता, कुछ ही दिनों में उसकी मौत हो जाती.

चार लोगों की मृत्यु

इस कुर्सी पर बैठने से केवल एक-एक करके चार लोगों की मौत हो गई. चार लोगों की मौत के बाद परिवार वालों को थॉमस का श्राप याद आया और तब उन्हें लगा कि यह कुर्सी अब पूरी तरह से शापित हो गई है.

सेना की भी मौत!

कुछ लोगों का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैनिक उस कुर्सी पर बैठे थे. जिसके बाद युद्ध के दौरान उन सभी सैनिकों की मृत्यु हो गई. कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि थॉमस की आत्मा आज भी उस कुर्सी पर है.

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यही वजह है कि इस कुर्सी को संग्रहालय में रखा गया है ताकि लोग इस कुर्सी से दूरी बनाए रखें और किसी की मौत न हो. लोग इतने डर गए कि उन्होंने इस कुर्सी का नाम ही डेथ चेयर रख दिया और यह कुर्सी इसी नाम से मशहूर हो गई. अब लोग इस कुर्सी को संग्रहालय में भी देखने से डरते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस


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Pankaj kumar Pandey

मैं पंकज कुमार पाण्डेय हूं और मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण से आता हूं, जो सत्याग्रह की धरती है. मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंपारण में ही हुई है. इसके बाद मैंने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की. अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा हूं. इस दौरान रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचार प्रस्तुति से जुड़े अहम पहलू सीखने को मिले. वर्तमान में मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं, जहां मेरी विशेष रुचि राजनीति, विदेश और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी खबरों में है. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता महज एक नौकरी नहीं बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है.

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