पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के बीच एक अभूतपूर्व कानूनी हलचल देखने को मिली है. दरअसल मंगलवार की आधी रात को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई, जिसमें यूपी कैडर के चर्चित आईपीएस अजय पाल शर्मा को चुनाव ड्यूटी से तुरंत हटाने की मांग की गई है.
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ई-फाइल की गई इस याचिका ने सियासी गलियारों में यह चर्चा (Bengal Elections: TMC BJP Clash) छेड़ दी है कि क्या एक पुलिस अफसर की सख्ती से बंगाल की सत्ताधारी पार्टी इतनी डरी हुई है कि उसे सीधे सर्वोच्च अदालत की शरण लेनी पड़ी?
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में अजय पाल शर्मा की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता का आरोप है कि दक्षिण 24 परगना में तैनाती के बाद शर्मा ने एक ऑब्जर्वर की मर्यादा लांघते हुए राजनीतिक उम्मीदवारों को निशाना बनाया है.
याचिका में कहा गया कि वे डराने और अनुचित दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 का हवाला देते हुए मांग की गई है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस ‘पक्षपाती’ अफसर को तुरंत मैदान से बाहर किया जाए.
अजय पाल शर्मा और चुनाव आयोग की सख्ती का असर आंकड़ों में साफ दिख रहा है. मतदान से पहले पिछले 72 घंटों में राज्य भर में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करते हुए 2348 संदिग्ध उपद्रवियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है. इसमें पानीहाटी और बर्दवान के टीएमसी पार्षद भी शामिल हैं. आयोग का आदेश साफ था कि “सुबह तक एक भी उपद्रवी बाहर नहीं दिखना चाहिए. सोमवार रात को ही 800 से ज्यादा लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया, जिसने पूरे राजनीतिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है.
आज 142 सीटों पर हो रहा मतदान सुरक्षा के लिहाज से भारतीय इतिहास के सबसे कड़े पहरे वाले चुनावों में से एक बन गया है. सुरक्षा की ये बड़ी तस्वीर देखिए:
CAPF के जवान: 2.3 लाख से ज्यादा केंद्रीय बल तैनात.
राज्य पुलिस: 38,297 पुलिसकर्मी मोर्चा संभाले हुए.
ऑब्जर्वर्स की फौज: 142 जनरल, 95 पुलिस और 100 खर्च ऑब्जर्वर के साथ NIA की टीमें भी ग्राउंड पर मौजूद हैं.
वारंट की झड़ी: 653 गैर-जमानती वारंट जारी कर हिस्ट्रीशीटरों को न्यूट्रलाइज किया गया है.
तृणमूल कांग्रेस ने अजय पाल शर्मा को ‘योगी का एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ बताते हुए पहले ही उन पर निशाना साधा था. फाल्टा में टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के घर जाकर दी गई उनकी चेतावनी और उसके बाद जॉइंट बीडीओ के ट्रांसफर ने दीदी के गढ़ में खलबली मचा दी है.
वहीं अखिलेश यादव और टीएमसी का मुखर विरोध (Bengal Elections: TMC BJP Clash) यह संकेत देता है कि अजय पाल शर्मा की ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली पुलिसिंग ने विपक्षी रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. अब देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट इस ‘आधी रात वाली अर्जी’ पर क्या रुख अपनाता है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
Swami Govind Dev Giri wishes Amit Shah birthday: गृह मंत्री अमित शाह के जन्मदिन पर…
पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था आज की चुनौतियों का समाधान नहीं कर…
Chandauli Double Murder: चंदौली के धीना थाना क्षेत्र में दो युवकों के शव बोरे में…
Kashi Sanskriti Sansad Sunil Deodhar Swami Jitendranand: काशी में 3, 4 और 5 नवंबर को…
15th All India Police Archery Championship Ranchi Santosh Gangwar: रांची के मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में…
तिब्बत और चीन में 7.0 तीव्रता के भूकंप से कई इलाकों में झटके महसूस किए…