Swami Avimukteshwaranand Controversy: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के बीच छिड़ा विवाद अब एक नए और बेहद निजी मोड़ पर आ गया है. बटुकों के यौन उत्पीड़न मामले की पैरवी कर रहे आशुतोष महाराज ने अब सीधे तौर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के संन्यास और उनकी पवित्रता पर सवाल उठाते हुए उनके वैवाहिक जीवन और संतान होने का सनसनीखेज दावा किया है.
शामली से जारी एक वीडियो संदेश में आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने दावा किया कि जिसे जगतगुरु शंकराचार्य बताया जा रहा है, वह पूरी तरह ‘फर्जी’ है. उन्होंने आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद का एक बेटा है जो विद्यापीठ में शिक्षा ग्रहण कर रहा है. महाराज ने कहा, “शंकराचार्य परंपरा की मर्यादा के अनुसार संन्यासी का विवाहित होना असंभव है, लेकिन इनके साथ इनकी पत्नी मठ में रहती है.”
आशुतोष महाराज ने अपने दावों को और विस्तार देते हुए कहा कि नंदिनी नाम की एक महिला, जो पहले उनकी गर्लफ्रेंड थी, अब ‘पूर्णाम्बा’ नाम से उनके साथ रहती है. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी को संशय है, तो वह शंकराचार्य, महिला और उस बच्चे का डीएनए (DNA) टेस्ट करा ले, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चे को विद्यापीठ में इसलिए पढ़ाया जा रहा है ताकि भविष्य में उसे भी संत बनाया जा सके.
हरिद्वार और ऋषिकेश के प्रवास के दौरान आशुतोष महाराज ने संत समाज से मुलाकात की और उन्हें आगामी ‘सनातन न्याय यात्रा’ में शामिल होने का निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि यह यात्रा आदि गुरु शंकराचार्य की पवित्र गद्दी की मर्यादा बचाने के लिए है. उनका तर्क है कि माननीय उच्चतम और उच्च न्यायालय के आदेशानुसार अभी ज्योतिष पीठ का कोई वैध शंकराचार्य नहीं है, ऐसे में खुद को शंकराचार्य बताना गद्दी का अपमान है.
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यह विवाद तब और गहरा गया जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 मार्च को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को यौन उत्पीड़न मामले में अग्रिम जमानत दे दी. कोर्ट ने इस दौरान आशुतोष महाराज की भूमिका पर भी सवाल उठाए
यौन उत्पीड़न के आरोपों से शुरू हुआ यह मामला अब व्यक्तिगत चरित्र हनन और गद्दी की दावेदारी के संघर्ष में बदल गया है. जहां एक ओर आशुतोष महाराज ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर गिरफ्तारी की मांग की है, वहीं दूसरी ओर उनके इन नए दावों ने संत समाज और धर्मप्रेमियों के बीच भारी हलचल पैदा कर दी है. अब देखना यह है कि न्यायालय इन नए आरोपों और डीएनए टेस्ट की मांग पर क्या रुख अपनाता है.
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