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‘खाकी पहनकर नटवरलाल बना फिरता…!’ साइबर सेल ने खोल दी पोल, आजमगढ़ में दबोचे गए ‘सीओ साहब’

Fake CO arrested in Azamgarh: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में खाकी वर्दी का रौब दिखाकर मासूम लोगों को अपने जाल में फंसाने वाले एक हाई-प्रोफाइल ‘फर्जी सीओ’ (डिप्टी एसपी) का गंभीरपुर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने भंडाफोड़ कर दिया है. पकड़ा गया शातिर ठग पुलिस की वर्दी पहनकर बाकायदा वीडियो कॉल करता था और खुद को पुलिस विभाग का बड़ा अफसर बताकर लोगों से शराब का ठेका और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठता था. पुलिस ने आरोपी के कब्जे से फर्जी पुलिस आईडी कार्ड, शराब ठेके का फर्जी आवंटन पत्र, पुलिस की वर्दी और मोबाइल फोन बरामद किया है.

खाकी का खौफ दिखाकर कैसे करता था खेल?(Fake CO arrested in Azamgarh)

पकड़े गए आरोपी की पहचान मगरावा गांव निवासी संजय के रूप में हुई है. संजय का ठगी करने का अंदाज बेहद हाईटेक और शातिर था. वह खुद को उत्तर प्रदेश पुलिस में क्षेत्राधिकारी (सीओ) या डिप्टी एसपी बताता था. पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए वह पुलिस की तीन स्टार वाली स्टार वर्दी पहनकर सीधे व्हाट्सऐप वीडियो कॉल करता था.

वर्दी देखकर सामने वाला व्यक्ति उसे सचमुच का पुलिस अफसर मान लेता था, जिसके बाद वह सरकारी नौकरी, ट्रांसफर और शराब का ठेका दिलाने के नाम पर भारी-भरकम रकम की मांग करने लगता था.

20 लाख की डील और 90 हजार की ठगी

मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने गंभीरपुर थाने में संजय के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई. पीड़ित के अनुसार, आरोपी ने शराब का ठेका दिलाने के नाम पर कुल 3.20 लाख रुपये की डील तय की थी और 30 अगस्त को एडवांस के तौर पर 90,000 रुपये ऐंठ लिए थे.

इसके बाद 1 सितंबर को उसने फिर से पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल की और खुद को बड़ा प्रशासनिक अधिकारी बताकर बाकी पैसों का दबाव बनाने लगा. जब पीड़ित को शक हुआ और उसने गुपचुप जांच-पड़ताल की, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई-क्योंकि वो कथित सीओ कोई अफसर नहीं बल्कि एक शातिर ठग था.

रानीपुर रजमों मोड़ पर दबोचा गया फर्जी CO

17 सितंबर को पीड़ित की तहरीर पर गंभीरपुर थाने में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा का गंभीर मुकदमा दर्ज किया गया. इसके तुरंत बाद गंभीरपुर थाना पुलिस और आजमगढ़ साइबर सेल की संयुक्त टीम ने आरोपी का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाया. सटीक डिजिटल लोकेशन का पीछा करते हुए पुलिस टीम ने जाल बिछाया और आरोपी संजय को रानीपुर रजमों मोड़ के पास से धर दबोचा. पुलिस की अचानक हुई इस घेराबंदी से ‘फर्जी सीओ’ को संभलने तक का मौका नहीं मिला.

तलाशी में कैसे खुला काला सच?

गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने आरोपी संजय की तलाशी ली, तो उसके पास से बेहद चौंकाने वाले दस्तावेज और सामान बरामद हुए. उसके कब्जे से:

पुलिस विभाग के 2 फर्जी अधिकारी पहचान पत्र (ID Cards)

आबकारी विभाग के नाम पर तैयार किया गया शराब ठेके का फर्जी आवंटन पत्र

खाकी वर्दी (पुलिस यूनिफॉर्म) का पूरा एक सेट

ठगी और वीडियो कॉल में इस्तेमाल किया जाने वाला मोबाइल फोन जब्त किया गया.

यह भी पढ़ें: ‘कार्बन उत्सर्जन में विकसित देश 6 गुना आगे…दोष विकासशील देशों पर क्यों?’ अंतरराष्ट्रीय मंच से पीएम मोदी की ललकार

2017 से चला आ रहा है जालसाजी का काम

पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई (Fake CO arrested in Azamgarh) है कि पकड़ा गया आरोपी संजय कोई नया अपराधी नहीं है, बल्कि उसका आपराधिक इतिहास पुराना है. साल 2017 में भी गंभीरपुर थाने में उसके खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज हुआ था. जेल से बाहर आने के बाद उसने ठगी का यह नया और शातिराना तरीका (वर्दी पहनकर वीडियो कॉल करना) इजाद कर लिया था.

आजमगढ़ पुलिस अब उसके पुराने कारनामों और अन्य पीड़ितों की सूची खंगाल रही है, जबकि आरोपी को कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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