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Bengal & Tamil Nadu Election Results 2026: आज 4 मई 2026 की शाम भारतीय राजनीति के इतिहास में एक ‘टर्निंग पॉइंट’ के रूप में दर्ज हो रही है. पश्चिम बंगाल में 193 सीटों पर बीजेपी की प्रचंड बढ़त और तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के किले में थलपति विजय (TVK) की 107 सीटों वाली ‘सुनामी’ (Tamil Nadu TVK win) ने एक बात साफ कर दी है कि जनता अब ‘सनातन’ का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी.
दरअसल ममता बनर्जी की विदाई और स्टालिन के गढ़ में लगी सेंध ने यह साबित कर दिया है कि जब राजनीति आस्था को चोट पहुँचाती है, तो जनता ईवीएम के जरिए हिसाब बराबर करती है.
बता दें कि बंगाल में ममता बनर्जी की इस करारी हार के पीछे उनके मंत्रियों और उनके खुद के बयानों का बड़ा हाथ माना जा रहा है.
ममता का ‘गंदा धर्म’ बयान: मार्च 2025 में ईद के मंच से हिंदुत्व की राजनीति को ‘गंदा धर्म’ कहना सनातनी मतदाताओं को चुप चुभा.
फिरहाद हकीम की ‘दुर्भाग्य’ वाली टिप्पणी: “हिंदू बनकर जन्म लेना दुर्भाग्यपूर्ण है” जैसे बयानों ने बंगाल के भद्रलोक और आम हिंदू को अपमानित महसूस कराया.
हुमायूं कबीर और मदन मित्रा: “हिंदुओं को गंगा में डुबो देंगे” और “राम मुस्लिम थे” जैसे बेतुके बयानों ने आग में घी का काम किया.
इन्हीं बयानों का नतीजा है कि बीजेपी की 193 सीटों की आंधी ने टीएमसी को 95 पर समेट दिया और पहली बार बंगाल में ‘भगवा सरकार’ का रास्ता साफ कर दिया.
तमिलनाडु में जिस डीएमके ने दशकों से ‘हिंदू विरोध’ को अपनी ढाल बनाया था, आज उसका किला ढहता नजर आ रहा है.
उदयनिधि स्टालिन: सितंबर 2023 में सनातन धर्म की तुलना ‘डेंगू और मलेरिया’ से करना और इसे जड़ से खत्म करने की बात करना उनके लिए आत्मघाती साबित हुआ.
ए. राजा और पोनमुडी: हिंदू धर्म को ‘दुनिया के लिए खतरा’ बताना और तिलक-वैष्णव संप्रदाय पर भद्दी टिप्पणियां करना तमिलनाडु के भक्ति मार्ग वाली जनता को रास नहीं आया.
इन्हीं बयानों का नतीजा है कि आज जोसेफ विजय की TVK 107 सीटों पर आगे है और स्टालिन की DMK महज 68 सीटों पर सिमटती दिख रही है. यह ‘सनातन’ के प्रति नफरत का सीधा जवाब है.
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्षी दलों ने ‘तुष्टीकरण’ के चक्कर में बहुसंख्यक समाज की आस्था का मजाक उड़ाया. राम मंदिर के खिलाफ टिप्पणियां हों या भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल कि जनता ने चुपचाप अपनी बारी का इंतज़ार किया और वोट की चोट से जवाब दिया. अमित शाह का यह कहना कि “बंगाल का बेटा ही बंगाल चलाएगा”, उस गौरव को वापस लाने की कोशिश है जिसे टीएमसी के ‘बाहुबलियों’ ने कुचला था.
आज अरब सागर से गंगासागर तक जो भगवा गलियारा बना है, वह दरअसल अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी के उस विजन की जीत है जहाँ ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ सर्वोपरि था. गुजरात, यूपी, एमपी, बिहार के बाद अब बंगाल का इस लिस्ट में जुड़ना भारत की राजनीति में ‘प्रो-हिंदू’ राजनीति की स्वीकार्यता पर मुहर लगाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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