bengal election latest news: बंगाल में आज जो भगवा लहर दिख रही है, उसके पीछे उन जवानों की मेहनत है जो तपती धूप में हाथ में इंसास (INSAS) लेकर बूथों पर डटे रहे. दशकों से बंगाल का चुनावी इतिहास ‘खून से सनी मतपेटियों’ का रहा है. दरअसल साल 2021 के चुनाव और 2023 के पंचायत चुनाव में जो नंगा नाच हुआ था, उसे दुनिया ने देखा था कि सैकड़ों घर जलाए गए और दर्जनों कार्यकर्ताओं की हत्या हुई. लेकिन 2026 में CRPF के ‘सुपर एक्शन’ ने ममता के उन ‘बाहुबलियों’ के हाथ बांध दिए, जो हर बार चुनाव लूट लेते थे.
हिंसा के साये से बाहर निकला बंगाल(bengal Result Update)
याद करिए 2021 के चुनाव के बाद की वो तस्वीरें, जब हज़ारों लोग जान बचाकर असम भाग गए थे. लेकिन इस बार अमित शाह और CRPF DG जीपी सिंह की रणनीति ने बाजी पलट दी है.
पहले: कथित तौर पर स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से ‘छप्पा वोट’ (एक ही आदमी द्वारा कई वोट) डाले जाते थे.
अब: 2.5 लाख केंद्रीय जवानों ने ‘एरिया डोमिनेंस’ के जरिए उपद्रवियों को उनके घरों में ही कैद कर दिया.
यही कारण (bengal election CRPF Impact) है कि इस बार बंगाल में बीजेपी 180+ सीटों पर बढ़त बना पाई, क्योंकि पहली बार वोटर बिना किसी ‘कट्टे या बम’ के डर के बूथ तक पहुँच पाया.
पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र मालदा में CRPF के जवानों को भर दिया गया है।
यदि मजहबी उन्माद फैलाए, पत्थर चलाया या गुंडागर्दी किया तो वह हाल किया जाएगा कि आने वाली सात पुश्ते याद रखेंगी pic.twitter.com/DzCCWg3uyC
— Chandan Sharma (@ChandanSharmaG) May 4, 2026
इस बार की कोशिश लेकिन…
दक्षिण 24 परगना के फालता में इस बार (bengal election Update)भी पुराने तरीके से चुनाव प्रभावित करने की कोशिश हुई. वहां कुछ बूथों पर बीजेपी के ‘कमल’ वाले बटन के आगे टेप चिपका दिया गया था ताकि कोई वोट न डाल सके. पहले ऐसे मामलों में पुलिस मूकदर्शक बनी रहती थी, लेकिन इस बार CRPF की रिपोर्ट पर चुनाव आयोग ने तुरंत एक्शन लिया और री-पोलिंग (पुनर्मतदान) के आदेश दे दिए. सुरक्षाबलों की इसी सख्ती ने फर्जी मतदान के खेल को शुरुआती दौर में ही खत्म कर दिया.
‘किंग मेकर’ बनी CRPF की 500 कंपनियां?
बंगाल में चुनाव तो खत्म हो गए, लेकिन असली डर ‘रिजल्ट के बाद की हिंसा’ का होता है. इसे भांपते हुए केंद्र ने 500 कंपनियां (200 CRPF, 150 BSF, 50 ITBP, 50 CISF, 50 SSB) को अगले 60 दिनों तक बंगाल में ही रहने का आदेश दिया है. यह पहली बार है जब किसी राज्य में चुनाव के बाद इतने लंबे समय तक केंद्रीय बल तैनात रहेंगे. जवानों ने साफ़ कर दिया है कि “जीत जिसकी भी हो, उपद्रव करने वाले का हिसाब मौके पर होगा.
सनातनी वोटर का ‘सुरक्षा कवच’?(bengal election CRPF Impact)
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी माना कि इस बार केंद्रीय बलों की मौजूदगी ने हिंदू और सनातनी मतदाताओं को वो हौसला दिया, जो सालों से दबा हुआ था. जब बूथ पर पुलिस के बजाय CRPF का जवान खड़ा दिखा, तो संदेश साफ था कि ‘निडर होकर बटन दबाओ.’ इसी निष्पक्ष चुनाव का नतीजा है कि आज गुजरात से बंगाल तक का भगवा गलियारा पूरा हो रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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