CBI Action : जम्मू-कश्मीर के इतिहास में 8 दिसंबर 1989 की तारीख एक ऐसे दर्दनाक अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसने न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश की राजनीति और सुरक्षा ढांचे को हिला कर रख दिया था. तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का अपहरण भारत में आतंकवाद की रणनीति और सरकारी निर्णयों की दिशा बदलने वाली सबसे बड़ी घटनाओं में से एक बना और अब 35 साल बाद इस मामले में एक महत्वपूर्ण गिरफ्तारी ने इस पुराने, लेकिन बेहद ज़रूरी केस को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है.
8 दिसंबर 1989 को श्रीनगर की सड़कों पर सामान्य दिनचर्या चल रही थी. इसी बीच, एक मिनी-बस (माटाडोर) में अस्पताल से घर लौट रहीं मेडिकल इंटर्न रुबैया सईद को JKLF (जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) के 4 आतंकवादियों ने अचानक रोक लिया.
बंदूकधारियों ने बस को घेरकर रुबैया को जबरन उतारा और मारुति कार में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले गए.
यह कोई साधारण अपहरण नहीं था, यह वह दौर था जब घाटी में अलगाववाद तेजी पकड़ रहा था और आतंकी संगठन अपनी रणनीति बदल रहे थे। JKLF इस घटना के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दिखाने और भारत सरकार को झुकाने की कोशिश कर रहा था.
अपहरण के कुछ ही समय बाद JKLF ने सरकारी चैनलों के जरिए अपनी प्रमुख मांग जेल में बंद 5 आतंकवादियों की रिहाई रखी. रुबैया की जान बचाने के लिए केंद्र सरकार के सामने यह एक कठिन फैसला था. सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी आपत्तियों के बावजूद, तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों में सरकार ने दबाव में आकर यह मांग मान ली और 13 दिसंबर 1989 को, 5 कैदी रिहा किए गए और इसके कुछ ही घंटों बाद रुबैया सईद को छोड़ दिया गया.
इस घटना को देश में एक बड़े सुरक्षा समझौते के रूप में देखा गया, जिसके दीर्घकालिक परिणाम बाद में घाटी में और तेज़ आतंकवाद के रूप में सामने आए.
1 दिसंबर 2025 को CBI ने इस केस में एक बड़ा कदम उठाते हुए फरार आरोपी शफात अहमद शांगलू को श्रीनगर में गिरफ्तार कर लिया. शांगलू पिछले तीन दशकों से सरकारी एजेंसियों से बचता फिर रहा था। उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था, और वह CBI की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में शामिल था.
CBI के अनुसार शांगलू JKLF के ऑपरेशन विंग से जुड़ा था, उसने अपहरण की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई थी. उसे JKLF प्रमुख यासीन मलिक का करीबी माना जाता है और उसके खिलाफ RPC और TADA जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज है. गिरफ्तारी के बाद CBI ने उसे जम्मू की विशेष TADA अदालत में पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है. (CBI Action)
शांगलू की गिरफ्तारी कई मायनों में बड़ी है
1. 35 साल पुरानी फरारी का अंत, यह देश के सबसे हाई-प्रोफाइल अपहरण मामलों में से एक था। इतने सालों बाद आरोपी का पकड़ में आना एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है.
2. केस की नई जांच दिशा
CBI की कार्रवाई से इस केस में नई जान आने की उम्मीद है.
शांगलू की गिरफ्तारी से अन्य फरार आरोपियों की भूमिका भी सामने आएगी. इसके साथ ही JKLF की विस्तृत ऑपरेशन प्लानिंग और 1989 की राजनीतिक परिस्थितियों की अंदरूनी परतें भी खुल सकती हैं.
3. घाटी के सुरक्षा इतिहास की पुनर्समीक्षा
यह मामला उस दौर की याद दिलाता है जब आतंकवाद का ढांचा मजबूत हो रहा था और सरकार कई स्तरों पर दबाव झेल रही थी.
अब यह गिरफ्तारी उस समय लिए गए सरकारी निर्णयों खासकर 5 आतंकियों की रिहाई पर फिर से बहस खड़ी कर सकती है.
• 8 दिसंबर 1989 – रुबैया सईद का अपहरण
• 13 दिसंबर 1989 – 5 आतंकी रिहा, रुबैया को छोड़ा गया
• 1990–2000 – JKLF का पतन, कई आरोपी भूमिगत
• 2021 – CBI ने विस्तृत चार्जशीट दायर की
• 1 दिसंबर 2025 – शफात अहमद शांगलू गिरफ्तार
• आगे – TADA कोर्ट में सुनवाई, अन्य गिरफ्तारियों की संभावना
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शफात शांगलू की गिरफ्तारी के बाद क्या नए खुलासे होंगे?
क्या अन्य आरोपी भी कानून के शिकंजे में आएंगे?
और क्या यह मामला उन राजनीतिक निर्णयों पर फिर से प्रकाश डालेगा जिन्होंने 1989 में देश की सुरक्षा सोच को झकझोर दिया था?
यह गिरफ्तारी साफ करती है कि कानून देर से चल सकता है, लेकिन अंधा नहीं होता. (CBI Action)
35 साल पुराने इस केस में न्याय की प्रक्रिया नए चरण में प्रवेश कर चुकी है, और देश एक बार फिर इस ऐतिहासिक घटना के नए अध्याय का इंतजार कर रहा है.
भारत एक्सप्रेस
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