Abhijeet Dipke Bail Conditions: राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर मचे सियासी और कानूनी घमासान के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को शनिवार को अदालत से बड़ी राहत मिल गई. दिल्ली पुलिस द्वारा शांति भंग करने के आरोप में की गई गिरफ्तारी के बाद उन्हें मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया गया, जहां दोनों पक्षों के बीच लंबी कानूनी बहस के बाद कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी.
अदालत के निर्देश पर शांति बनाए रखने के लिए अनिवार्य बॉन्ड (Peace Bond) भरने और कानूनी शर्तों को स्वीकार करने के बाद दीपके को रिहा कर दिया गया. रिहाई के तुरंत बाद वे दिल्ली में एनसीपी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनीश गवांडे के आवास पहुंचे, जहां मीडिया के कैमरों को उन्होंने हाथ हिलाकर विक्ट्री का साइन दिखाया, हालांकि उन्होंने सीधे कोई बयान नहीं दिया.
मंदिर मार्ग स्थित एसईएम कोर्ट में दोपहर से लेकर शाम तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच तीखी बहस हुई. अदालत ने दीपके को कुछ सख्त शर्तों के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया.
1- शांति बनाए रखने का मुचलका: अदालत ने स्पष्ट किया कि दीपके को कानूनी रूप से पाबंद करने के लिए शांति बनाए रखने के बांड पर हस्ताक्षर करने होंगे. यदि भविष्य में किसी भी तरह से कानून-व्यवस्था या सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने का प्रयास किया गया, तो यह जमानत तुरंत रद्द हो जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
2- जमावड़े से दूर रहने की हिदायत: पुलिस ने दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 की औपचारिकताओं के बाद दीपके को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत गिरफ्तार किया था. अदालत ने उन्हें किसी भी नए भड़काऊ या गैर-कानूनी जमावड़े से दूर रहने की हिदायत दी है.
2- पुनरावृत्ति पर सख्त चेतावनी: अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए चेताया कि 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत के दौरान भी उनसे एक वर्ष तक शांति बनाए रखने के मुचलके पर हस्ताक्षर कराए गए थे. ऐसे में बार-बार नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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रिहाई के बाद सीजेपी की प्रवक्ता मेहर पसरीचा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन असहमति की आवाजों और सच से घबरा रहा है. वहीं, हिरासत से छूटीं आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने मंडी हाउस से की गई हिरासत को पूरी तरह अलोकतांत्रिक और गैर-कानूनी करार दिया. फिलहाल, कड़े बांड और शर्तों पर रिहा हुए अभिजीत दीपके के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जबकि दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी तत्व से सख्ती से निपटा जाएगा.
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