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चुनाव से पहले राहुल गांधी का बड़ा दांव: बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, जानें क्या है पूरा प्लान?

Congress Organizational Reshuffle 2026: कांग्रेस में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद अब और तेज हो गई है. पार्टी नेतृत्व ने संगठन के कामकाज में AICC सेक्रेटरी की भूमिका बढ़ाने का फैसला किया है. सूत्रों के मुताबिक, अब महासचिव और प्रभारी के साथ लगाए गए सेक्रेटरी को संबंधित राज्यों में हर महीने कम से कम 15 से 20 दिन बिताने के निर्देश दिए गए हैं. यानी AICC सेक्रेटरी अब सिर्फ राज्यों के दौरे करने वाले पदाधिकारी नहीं होंगे, बल्कि नियमित तौर पर संगठन की निगरानी करेंगे. उन्हें राज्यों में स्पष्ट जिम्मेदारियां दी जाएंगी और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों के अमल की भी निगरानी करनी होगी.

सूत्रों के मुताबिक, यह व्यवस्था मौजूदा AICC सेक्रेटरी के साथ-साथ आने वाले दिनों में नियुक्त किए जाने वाले नए सेक्रेटरी पर भी लागू होगी. संगठन में नई टीम तैयार करने की प्रक्रिया के तहत राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की सक्रिय भूमिका भी सामने आ रही है. हाल ही में कांग्रेस नेतृत्व ने AICC सेक्रेटरी पद के लिए बड़ी संख्या में नेताओं का इंटरव्यू और आकलन किया है.

जिला स्तर तक होगी परफॉर्मेंस की निगरानी

कांग्रेस अब संगठन सृजन अभियान के अगले चरण में जिला और उससे नीचे के स्तर पर काम करने वाले पदाधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने की तैयारी में है. जिला अध्यक्षों के साथ-साथ मंडल और ब्लॉक अध्यक्षों के कामकाज की भी समीक्षा की जाएगी. सूत्रों के अनुसार, जिला अध्यक्षों को A, B और C कैटेगरी में बांटने की तैयारी है. जिन अध्यक्षों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया जाएगा, उन्हें नोटिस दिए जा सकते हैं.

वहीं राज्यों में पार्टी के विभिन्न विभागों और सेल्स के कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुखों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. बिहार में मंडल और ब्लॉक स्तर के अध्यक्षों के कामकाज की समीक्षा की प्रक्रिया इसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.

महासचिवों की भी होगी नियमित मॉनिटरिंग

संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल लगातार राज्यों के नेतृत्व के साथ समीक्षा बैठकें कर रहे हैं. कांग्रेस के हालिया संगठनात्मक फेरबदल में भी कई महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी नए महासचिवों को दी गई है.
5 सितंबर को किए गए फेरबदल में सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया गया, जबकि रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात की जिम्मेदारी दी गई. सुरजेवाला के पास कर्नाटक का प्रभार भी बरकरार है. भूपेश बघेल को असम, सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, डॉ. सिरिवेला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी.वी. मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया.

गुजरात में अब मासिक रिव्यू मीटिंग की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है. वहीं उत्तर प्रदेश में भी नए जिला अध्यक्षों और अलग-अलग संगठनात्मक स्तरों पर समितियों के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. वेणुगोपाल ने 4 सितंबर को यूपी नेतृत्व के साथ बैठक भी की थी.

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2029 के लिए अभी से संगठन पर फोकस

कांग्रेस नेतृत्व का फोकस सिर्फ अगले विधानसभा चुनावों तक सीमित नहीं दिख रहा है. पार्टी के भीतर संगठन को बूथ, मंडल, ब्लॉक और जिला स्तर तक लगातार सक्रिय रखने की व्यवस्था तैयार की जा रही है. यही वजह है कि AICC सेक्रेटरी की भूमिका को लेकर भी अब जवाबदेही बढ़ाई जा रही है.

राहुल गांधी की हालिया बैठकों में सेक्रेटरी के काम, राज्यों में उनकी सक्रियता और संगठनात्मक चुनौतियों पर फीडबैक लिया गया है.कांग्रेस के सामने अगले कुछ महीनों में कई अहम विधानसभा चुनाव हैं. ऐसे में पार्टी का फोकस अब केवल चुनावी अभियान पर नहीं, बल्कि चुनाव से पहले संगठन की लगातार मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करने पर है.

-भारत एक्सप्रेस

प्रशांत त्यागी, वरिष्ठ संवाददाता दिल्ली

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