दिल्ली हाई कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी अमिताभ झुनझुनवाला द्वारा दायर अंतरिम जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया है. अदालत ने ईडी को 5 दिनों के भीतर अपना जवाब और विस्तृत स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी.
इससे पहले राऊज एवेन्यु कोर्ट ने अमिताभ झुनझुनवाला की चिकित्सा आधार (Medical Ground) पर दायर अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. अपनी याचिका में उन्होंने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारियों का हवाला देते हुए नियमित/अंतरिम जमानत की गुहार लगाई है.
निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि इस मामले में आरोपी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. अदालत के मुताबिक, आरोपी पर इस वित्तीय अपराध को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाने और पूरी साजिश रचने का गंभीर आरोप है.
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में अमिताभ झुनझुनवाला सहित कुल 55 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर रखी है. अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को ईडी ने अप्रैल 2026 में गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी के अनुसार, इन दोनों पर अपराध की आय (Proceeds of Crime) को छिपाने और उसे वैध दिखाने में अहम भूमिका निभाने का आरोप है.
अमिताभ झुनझुनवाला मार्च 2003 से सितंबर 2019 तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के निदेशक रहे थे, जो कि RHFL और RCFL की होल्डिंग कंपनी है. इस बीच, रिलायंस एडीए ग्रुप ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि झुनझुनवाला और बापना दोनों का पिछले सात वर्षों से ग्रुप से कोई लेना-देना नहीं है. ग्रुप के मुताबिक, अमिताभ झुनझुनवाला ने सितंबर 2019 में और अमित बापना ने दिसंबर 2019 में ही रिलायंस ग्रुप छोड़ दिया था. उसके बाद से रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड सहित किसी भी इकाई से उनका कोई संबंध नहीं रहा है.
इसी महीने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ एक अन्य नया मामला दर्ज किया है, जो भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को ₹3,750 करोड़ (शिकायत में उल्लिखित कुल भ्रामक निवेश के संदर्भ में) के नुकसान से जुड़ा है.
धोखाधड़ी के आरोप: एलआईसी की शिकायत के आधार पर दर्ज इस एफआईआर में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, पैसों की हेराफेरी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. आरोप है कि आरकॉम और उसके प्रबंधन ने कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य और परिसंपत्ति कवर के बारे में झूठे दावे किए, जिसके आधार पर एलआईसी को भारी मात्रा में डिबेंचर खरीदने के लिए धोखे से प्रेरित किया गया.
फॉरेंसिक ऑडिट: बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा 15 अक्टूबर 2020 को सौंपी गई फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि आरकॉम और उसके प्रबंधन ने बैंकों व वित्तीय संस्थानों से जुटाए गए धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया है.
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