देश

‘सीआरपीएफ ने अपने अटूट साहस और कर्तव्यनिष्ठा से बनाई पहचान’, स्थापना दिवस पर बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 88वें स्थापना दिवस पर सभी जवानों और अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ने अपने साहस, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति समर्पण से देशभर में एक अलग पहचान बनाई है. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बल हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में देश और नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी निष्ठा से काम करता है.

देश की सुरक्षा में निभाई अहम भूमिका

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि सीआरपीएफ के जवानों ने हमेशा राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखा है. चाहे आंतरिक सुरक्षा बनाए रखना हो, प्राकृतिक आपदाओं के समय लोगों की मदद करनी हो या कठिन इलाकों में कानून-व्यवस्था संभालनी हो, सीआरपीएफ ने हर जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाया है. उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा पर नियंत्रण पाने में भी इस बल का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है, जिससे कई क्षेत्रों में शांति और विकास का रास्ता खुला है.

88 साल का गौरवशाली सफर

हर साल 27 जुलाई को सीआरपीएफ स्थापना दिवस मनाया जाता है. इस वर्ष बल ने अपना 88वां स्थापना दिवस मनाया. ‘सेवा और निष्ठा’ के आदर्श वाक्य के साथ काम करने वाला यह बल आज दुनिया का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल माना जाता है. शुरुआत सिर्फ दो बटालियन से हुई थी, लेकिन अब इसके पास 248 बटालियन और करीब 3.25 लाख जवान हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

ब्रिटिश दौर से आज तक का सफर

सीआरपीएफ की शुरुआत वर्ष 1939 में ब्रिटिश शासन के दौरान ‘क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस’ के नाम से हुई थी. स्वतंत्रता के बाद इसे नए स्वरूप में संगठित किया गया और 28 दिसंबर 1949 को बने सीआरपीएफ अधिनियम के तहत इसका नाम ‘केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल’ रखा गया. आज यह देश की सबसे पुरानी और भरोसेमंद सुरक्षा संस्थाओं में शामिल है.


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प्रधानमंत्री ने साझा किया संस्कृत संदेश

स्थापना दिवस की शुभकामनाओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया. उन्होंने बताया कि अच्छा चरित्र, सत्यनिष्ठा, विनम्रता और मर्यादित आचरण किसी भी व्यक्ति को समाज में सम्मान दिलाते हैं. ऐसे लोग हर जिम्मेदारी के योग्य माने जाते हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बनते हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि मजबूत नेतृत्व और लोगों का विश्वास जीतने की सबसे बड़ी ताकत उत्तम चरित्र ही है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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