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दिल्ली होटल अग्निकांड: बिना फायर NOC और सिंगल एग्जिट ने ली 21 मासूमों की जान, देश भर के होटलों में सुरक्षा भगवान भरोसे

Hotel Fire Accident: दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई. जांच में सामने आया कि इस होटल के पास न तो ‘फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट’ (NOC) था और न ही आपातकाल में बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता था. यह हादसा देश के होटलों में सुरक्षा नियमों की बड़ी अनदेखी को दिखाता है.

मालवीय नगर में एक होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक इस होटल के पास फायर सेफ्टी का सर्टिफिकेट नहीं था. दिल्ली सहित देश के बाकी जगहों पर भी ऐसी ही हालत है. जहां बिना जांच के अवैध रूप से होटल्स और रेस्टोरेंट्स का संचालन किया जा रहा.

बिना NOC होटल में हादसा: एक रास्ता, 21 मौतें

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘फ्लोरिश स्टे होटल’ (Flourish Stay Hotel) में लगी भीषण आग में 21 मासूम लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 15 लोग इस समय अस्पताल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे हैं. इस दर्दनाक हादसे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बचाव के लिए गए 10 पुलिसकर्मी भी आग के चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए है.

डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक ने इस मामले में बेहद चौंका देने वाला खुलासा किया है. उन्होंने अपने बयान में बताया कि इस होटल के पास फायर सेफ्टी का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NoC) नहीं था. होटल की बनावट ही ऐसी की गई थी कि उसे एनओसी नहीं दी जा सकती थी.

प्रत्यक्षदर्शीयों के मुताबिक, होटल में एंट्री और एग्जिट के लिए सिर्फ एक ही गेट था और जब बेसमेंट से आग और धुआं फैलना शुरू हुआ, तो लोगों के पास भागने के लिए कोई रास्ता नहीं था. चारों तरफ धुआं होने और दम घुटने की वजह से लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए शीशे तोड़े और ऊपरी मंजिलों से नीचे कूदना शुरू कर दिया.

होटल और शहरों में बढ़ती आग की घटनाएं

होटल में आग लगने का यह कोई पहला मामला नहीं है. पिछले कुछ महीनों में देश के कई शहरों में आग लगने से बहुत लोगों ने अपनी जान गंवाई है. दिल्ली फायर सर्विसेज (DFS) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से लेकर 27 मई तक सिर्फ दिल्ली में आग की कई घटनाओं ने 45 लोगों की जान ले ली हैं. इनमें से बस मई में 13 मौतें हुई, जबकि मार्च में 15 मौतें हुईं. बता दें कि सिर्फ मई के शुरुआत के 26 दिनों में ही फायर डिपार्टमेंट ने 2,877 आग लगने की घटनाओं पर कार्रवाई की है.

दिल्ली की ही तरह कोलकाता में भी 29 अप्रैल को सेंट्रल कोलकाता के ‘ऋतुराज होटल’ (Rituraj Hotel) में भी रात के समय भीषण आग लग गई थी, जिसमें दो बच्चों समेत 14 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. इस होटल के 42 कमरों में 88 मेहमान रूके हुए थे. होटल भारी शीशों से ढ़का हुआ था जिसकी वजह से धुआं बाहर नहीं निकल सका और वेंटिलेशन न होने की वजह से लोगों की दम घुटने से मौत हो गई.

NCRB के रिपोर्ट के मुताबिक,

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, भारत में हादसों में होने वाली कुल मौतों में से करीब 6 से 8% मौतें आग लगने की वजह से होती हैं. देश में हर साल आग की वजह से कुल 13,000 से 15,000 लोग अपनी जान गंवा देते हैं.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट बताती है कि पिछले दो-तीन सालों में अस्पतालों, गोदामों और होटल्स में भीषण आग लगने की घटनाएं बहुत ज्यादा बढ़ी हैं. इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं: पहला, गर्मियों में बिजली का इस्तेमाल बढ़ने से तारों पर लोड बढ़ जाता है. दूसरा, अंदर की सजावट में प्लास्टिक और जल्दी आग पकड़ने वाले सामान का ज्यादा इस्तेमाल होना और तीसरा, भीड़भाड़ वाले इलाकों में बिना किसी प्लानिंग के ऊंची-ऊंची बिल्डिंग्स बनाना.

आग लगने का कारण?

होटल और रेस्टोरेंट में आग लगने की सबसे बड़ी वजह बिजली का शॉर्ट सर्किट और अवैध निर्माण है. गर्मियों में भारी-भरकम एसी और रसोई के बड़े सामान के चलने से अचानक बिजली का लोड बढ़ जाता है, जिससे पुराने तार आग पकड़ लेते हैं. इसके अलावा, ज्यादा पैसा कमाने के लालच में तय से ज्यादा कमरे बना दिए जाते हैं और सुरक्षा को ध्यान में न रखते हुए इमरजेंसी एग्जिट के रास्तों को कबाड़ रखकर बंद कर दिया जाता है. कोलकाता और दिल्ली, दोनों हादसों में यह साफ देखने को मिला. पूरी तरह से बंद इमारतों में हवा के आने-जाने का रास्ता (ventilation) न होना ही सबसे ज्यादा मौतों की वजह बना क्योंकि लोग आग से बाद में जले, पहले धुएं के कारण उनका दम घुट गया.

यह भी पढ़ें:बिहार में पहले बढ़ाया DA, अब लगा दी बत्ती! CM सम्राट चौधरी का कर्मचारियों को अल्टीमेटम

आग लगने से कैसे बचे?

इस बढ़ती घटना को रोकने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए और साथ ही हमें कुछ चीजों का सख्त खयाल रखना चाहिए:

  • सबसे पहले बिना ‘फायर एनओसी’ (fire safety certificate) के चल रहे सभी होटलों और रेस्टोरेंट्स की पहचान करना चाहिए. अधिकारियों के अनुसार, अकेले मालवीय नगर जैसे कई इलाकों में ज्यादातर होटल बिना सही कागजों के चल रहे हैं.
  • हर कमर्शियल बिल्डिंग में बाहर निकलने के लिए कम से कम दो चौड़े रास्ते होने ही चाहिए. जिससे इमरजेंसी के समय लोग आसानी से अपनी जान बचा कर बाहर निकल जाएं.
  • होटल में काम करने वाले कर्मचारियों को आग बुझाने वाले सिलेंडर (Fire Extinguisher) का इस्तेमाल करना और मुसीबत के समय लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना सिखाया जाना चाहिए.

-भारत एक्सप्रेस 

Shubhra Rai

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