Pragati Maidan Tunnel Delay: ट्रैफिक के शोर और धुएं से निजात दिलाने के लिए बड़े जोर-शोर से ‘प्रगति मैदान टनल’ का तोहफा दिल्लीवालों को दिया गया था. दावा था कि अब आईटीओ (ITO) और मथुरा रोड का सफर मिनटों में पूरा होगा. लेकिन हकीकत कुछ और ही है. जिस टनल को जाम खत्म करने के लिए बनाया गया था, वह खुद अब दिल्ली के माथे की शिकन बन गई है.
आजकल अगर आप शाम के पीक ऑवर में प्रगति मैदान या भैरों मार्ग के आसपास से गुजर रहे हैं, तो अपनी घड़ी पर भरोसा करना छोड़ दीजिए. जो रास्ता महज 10 मिनट में पार हो जाना चाहिए, वहां गाड़ियां 30-30 मिनट तक रेंगती नजर आती हैं. आलम यह है कि लोग अब इस टनल में घुसने से पहले गूगल मैप्स चेक करना नहीं भूलते. कभी तकनीकी खामियां तो कभी अधूरा काम, इस पूरे कॉरिडोर ने यात्रियों का ‘लाइफस्टाइल’ बदल कर रख दिया है. लोग अब दफ्तर से घर जल्दी पहुंचने के बजाय सड़क पर जाम में फंसने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहते हैं.
इस पूरी मुसीबत की जड़ में है ‘अंडरपास-5’. यह प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर का वो हिस्सा है, जो सालों से अधूरा पड़ा है. कभी रेलवे से मंजूरी की फाइलें अटक जाती हैं, तो कभी स्ट्रक्चर की तकनीकी दिक्कतें काम रोक देती हैं. हाल ही में खबर आई है कि रेलवे से हरी झंडी मिल गई है और काम फिर से शुरू हुआ है. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अब इसकी नई डेडलाइन दिसंबर 2026 तय की गई है. यानी दिल्लीवालों को राहत मिलने में अभी लंबा इंतजार बाकी है.
सिर्फ जाम ही नहीं, इस टनल की इंजीनियरिंग पर भी सवाल उठते रहे हैं. मानसून के दौरान तो यहां के हालात किसी एडवेंचर आइलैंड जैसे हो जाते हैं. जरा सी भारी बारिश हुई नहीं कि टनल के अंदर पानी भर जाता है. कई बार तो स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि पुलिस को टनल के गेट बंद करने पड़ते हैं और पूरा ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ता है.
इससे न केवल मुख्य रास्ता, बल्कि आसपास के तमाम छोटे-बड़े रास्ते भी ब्लॉक हो जाते हैं. करोड़ों की लागत से बना ये प्रोजेक्ट पहली ही बारिश में ‘वॉटर पार्क’ की याद दिलाने लगता है.
अब सवाल यही उठता है कि क्या एजेंसियां इस बार दिसंबर 2026 की डेडलाइन को गंभीरता से लेंगी? या फिर हर बार की तरह नई तारीख दे दी जाएगी? प्रगति मैदान में अक्सर बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन होते हैं, उस वक्त तो यहां पैदल चलना भी दूभर हो जाता है.
सरकार और संबंधित एजेंसियां भले ही दावा कर रही हैं कि काम तेजी से चल रहा है, लेकिन दिल्ली की जनता अब दावों से ज्यादा काम पर भरोसा करना चाहती है. जब तक ये कॉरिडोर पूरी तरह फंक्शनल नहीं होता, तब तक आईटीओ और मथुरा रोड का जाम दिल्लीवालों की किस्मत बना रहेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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