Chandivali EVM Dispute: भारत के चुनावों में हार-जीत के बाद EVMपर सवाल उठना कोई नई बात नहीं है. विपक्ष लगातार इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता रहा है. लेकिन, आरोप-प्रत्यारोप की इस सियासत के बीच देश के चुनावी इतिहास में एक ऐसा पन्ना जुड़ रहा है, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया है. मुंबई की चांदीवली विधानसभा सीट पर इस्तेमाल हुई 20 EVM और VVPAT मशीनों की डायग्नोस्टिक जांच शुरू हो गई है. यह सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश के उस लोकतांत्रिक भरोसे की ‘अग्निपरीक्षा’ है, जिस पर पूरी चुनाव प्रणाली टिकी है.
यह पूरा मामला महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से जुड़ा है. मुंबई की चांदीवली विधानसभा सीट पर शिवसेना और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला था. चुनाव नतीजों में शिवसेना के उम्मीदवार दिलीप भाऊसाहेब लांडे को 1 लाख 24 हजार 641 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस नेता नसीम खान को 1 लाख 4 हजार 016 वोटों से संतोष करना पड़ा. नसीम खान ने इन नतीजों और EVM की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह जताते हुए हार स्वीकारने से इनकार कर दिया और नवंबर 2024 में ही पुनर्गणना और EVM जांच की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया.
कानूनी दांवपेच के बीच यह मामला हाई कोर्ट की मंजूरी के इंतजार में अटका रहा. आखिरकार फरवरी 2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने नसीम खान की याचिका पर 20 मशीनों के डायग्नोस्टिक चेक (Diagnostic Check) की अनुमति दे दी.
इसी आदेश के अनुपालन में अब मुंबई उपनगरीय जिला कलेक्टर के निर्देश पर बोरीवली ईस्ट में जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है. यह जांच दो दिनों तक चलेगी. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के विशेषज्ञ इंजीनियर कड़ी निगरानी और सीसीटीवी कैमरों की नजर में इन 20 मशीनों का तकनीकी ‘पोस्टमॉर्टम’ कर रहे हैं.
चुनाव आयोग के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के उन दिशा-निर्देशों के तहत हो रही है, जिनमें चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों को अपने क्षेत्र की 5 प्रतिशत मशीनों की जांच कराने का अधिकार दिया गया है. जांच के दौरान इंजीनियर EVM और VVPAT मशीनों के माइक्रोकंट्रोलर (Microcontroller) और मेमोरी (Memory) की गहराई से तकनीकी पड़ताल करते हैं. यह सुनिश्चित किया जाता है कि मतदान के दौरान या उसके बाद मशीनों में कोई बाहरी छेड़छाड़, हैकिंग या तकनीकी खराबी तो नहीं की गई थी.
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इस जांच को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे चुनाव का परिणाम बदल जाएगा? जानकारों की मानें तो यह जांच मुख्य रूप से संदेह दूर करने और चुनावी पारदर्शिता के सत्यापन के लिए होती है. यह सीधे तौर पर परिणाम नहीं बदलती. हालांकि, अगर इस डायग्नोस्टिक चेक में कोई बड़ी तकनीकी गड़बड़ी या ‘छेड़छाड़’ के सुबूत सामने आते हैं, तो यह न सिर्फ नसीम खान के लिए एक बड़ा कानूनी हथियार बनेगा, बल्कि पूरे देश में EVM की विश्वसनीयता पर एक ऐसी बहस छेड़ देगा, जिसे शांत करना चुनाव आयोग के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा.
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