Former Naksali Clear SSC Exam: जिंदगी जब ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दे जहां एक तरफ बंदूकों की बारूदी गड़गड़ाहट हो और दूसरी तरफ किताबों की खामोशी, तब सही रास्ता चुनना ही असली वीरता कहलाता है. छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के घने जंगलों में कभी AK-47 और बारूदी सुरंगों के साये में जवानी बिताने वाले पूर्व माओवादियों ने हिंसा का दामन छोड़कर इतिहास रच दिया है. पिछले साल हथियार डालने वाले 210 विद्रोहियों में से 7 ने ‘छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल’ की 10वीं (SSC) परीक्षा में शानदार परचम लहराया है.
इनमें से 3 ने फर्स्ट डिवीजन अंक हासिल कर साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ हो, तो अतीत के हर काले पन्ने को पलटकर नया भविष्य लिखा जा सकता है.
35 साल की गीता नारोते की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है. महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की रहने वाली गीता जब महज 10 साल की थीं, तब माओवादियों ने उनके पिता की बेरहमी से हत्या कर दी थी. हालातों के थपेड़ों के बीच वे खुद माओवादी संगठन में शामिल हो गईं. संगठन के भीतर उन्हें ‘डॉ. चंपा’ के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वे घायल नक्सलियों का इलाज करती थीं और गोलियों के घाव सिलती थीं.
पिछले साल हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटीं गीता ने 35 की उम्र में फर्स्ट क्लास से 10वीं पास की है और अब वे एक पेशेवर नर्स बनकर समाज की सेवा करना चाहती हैं.
32 साल के अर्जुन ओयाम और उनके साथी संतोष अचला की कहानी भी प्रेरणा की नई नजीर पेश करती है. बस्तर के जंगलों से लौटकर मुख्यधारा में शामिल होने के बाद अर्जुन दिन में मछली पालन और इलेक्ट्रिशियन का काम सीखते थे, और रात में दीये की रोशनी में 10वीं की पढ़ाई करते थे. स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने उनके कागजात बनवाने से लेकर काउंसलिंग तक में पूरी मदद की.
वहीं पारिवारिक त्रासदियों और गरीबी से जूझते हुए संतोष ने भी लगन के बल पर एसएससी परीक्षा पास कर ली.
जंगलों की अंधेरी दुनिया से निकलकर अचानक किताबों और सिलेबस में ढलना इन युवाओं के लिए आसान नहीं था. लेकिन मॉडर्न टेक्नोलॉजी और स्थानीय शिक्षकों ने इस राह को आसान बना दिया. कई पूर्व विद्रोहियों को सरकार की तरफ से दिए गए टैबलेट्स पर ऑनलाइन चैप्टर्स और पीडीएफ पढ़ने का मौका मिला. दोस्तों ने व्हाट्सएप (WhatsApp) के जरिए नोट्स भेजे और कठिन सवालों के जवाब समझाए. पुलिस अधिकारियों और लोकल टीचर्स की मदद से इनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया.
यह अभूतपूर्व सफलता (Former Naksali Clear SSC Exam) इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि अगर भटके हुए युवाओं को सही अवसर, सुरक्षा और सम्मान मिले, तो वे समाज के लिए सबसे बड़े बदलाव का जरिया बन सकते हैं. छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीतियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के मानवीय रुख ने इन 7 युवाओं की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया है.
आज गीता, अर्जुन और संतोष जैसे सांता माओवादी उन तमाम युवाओं के लिए सबसे बड़े रोल मॉडल बन चुके हैं जो आज भी जंगलों में बंदूकों की दुनिया में भटके हुए हैं. इनकी सफलता पूरी दुनिया को चिल्ला-चिल्लाकर यह पैगाम देती है कि बंदूक की नली से कभी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता. असली आजादी, ताकत और तरक्की का रास्ता सिर्फ और सिर्फ कलम, किताबों और शिक्षा से होकर ही गुजरता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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