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Muharram in Fatehpur Gaya: बिहार के गया जिले का फतेहपुर ने सामाजिक समरसता की एक अनोखी मिसाल पेश की है. जहां बिना किसी मुस्लिम आबादी के भी कई गांवों में हिंदू परिवार पीढ़ियों से पूरी श्रद्धा के साथ मुहर्रम का त्योहार मनाते और ताजिया रखते आ रहे हैं (Hindu-Muslim Unity).
बिहार के गया जिले का फतेहपुर ने सामाजिक समरसता की एक अनोखी मिसाल पेश की है. जहां बिना किसी मुस्लिम आबादी के भी कई गांवों में हिंदू परिवार पीढ़ियों से पूरी श्रद्धा के साथ मुहर्रम का त्योहार मनाते और ताजिया रखते आ रहे हैं. यहां के करीब 60 गांवों में हिंदू परिवार पीढ़ियों से पूरी श्रद्धा के साथ मुहर्रम मनाते आ रहे हैं. इनमें पतेया, गदहियाटांड़ और बहेरा जैसे कई ऐसे गांव भी शामिल हैं, जहां एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता.
इन गांवों में हिंदू परिवार खुद ताजिया का निर्माण कराते हैं और पारंपरिक तरीके से जुलूस निकालते हैं. पूर्वजों द्वारा निर्मित इमामबाड़ों में फातिहा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष रूप से मौलानाओं को आमंत्रित किया जाता है. इस कौमी एकता की पुष्टि सरकारी आंकड़े भी करते हैं. इस वर्ष प्रखंड में मुहर्रम के लिए 103 समितियों ने लाइसेंस का आवेदन किया है. पिछले वर्ष कुल 106 लाइसेंसों में से लगभग 60 लाइसेंस हिंदू परिवारों और उनकी समितियों के नाम जारी हुए थे.
ग्रामीणों के अनुसार, यह परंपरा पूर्वजों के समय से जुड़ी मन्नत, गहरी आस्था और आपसी भाईचारे का प्रतीक है. पतेया गांव के नरेश पंडित और बहेरा के योगेंद्र पासवान बताते हैं कि संकट टलने की मन्नत पूरी होने के बाद शुरू हुई यह परंपरा आज भी क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत कर रही है (Ganga Jamuni Tehzeeb).
-भारत एक्सप्रेस
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