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गोंदिया में कला का गला घोंट रही प्रशासनिक सुस्ती; 15 वर्षों से अधूरा पड़ा है थिएटर, कलाकार पूछ रहे- ‘हमें मंच कब मिलेगा?’

Gondia Theater Project: किसी भी शहर की सांस्कृतिक पहचान वहां के कला केंद्रों और थिएटरों से होती है, लेकिन महाराष्ट्र के गोंदिया जिले की कहानी कुछ अलग ही है. जिले के कलाकारों को एक सही प्लेटफॉर्म देने और उनके टैलेंट को तराशने के मकसद से शुरू किया गया थिएटर प्रोजेक्ट पिछले 15 सालों से ‘फंड’ और ‘इच्छाशक्ति’ की कमी के बीच फंसा हुआ है. आज गोंदिया के कलाकार मायूसी के साथ पूछ रहे हैं “क्या कोई हमें थिएटर दे सकता है?”

2012 में रखी गई थी नींव

गोंदिया शहर के रेलटोली इलाके में इस थिएटर का निर्माण कार्य गोंदिया नगर परिषद द्वारा किया जा रहा है. साल 2012 में कांग्रेस शासन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने बड़े उत्साह के साथ इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था. महाराष्ट्र के सांस्कृतिक विभाग ने इसके लिए शुरुआती तौर पर 12 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया था. लेकिन प्रशासन की कछुआ चाल का नतीजा यह है कि 15 साल बाद भी थिएटर का सिर्फ 60 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है.

12 करोड़ से 26 करोड़ तक पहुंचा खर्च

वक्त के साथ निर्माण सामग्री की कीमतें बढ़ती गईं और देरी की वजह से इस प्रोजेक्ट की लागत भी आसमान छूने लगी. जो थिएटर 2012 में 12 करोड़ रुपये में बनकर तैयार होना था, उसकी लागत कुछ साल पहले बढ़कर 14 करोड़ रुपये हुई और अब यह आंकड़ा 26 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.

नगर परिषद प्रशासन का कहना है कि फंड की कमी के कारण काम रुका हुआ है. हालांकि, सवाल यह उठता है कि जब सरकार ने शुरुआत में फंड जारी किया था, तो उसे समय सीमा के भीतर इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया?

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कलाकारों का दर्द: ‘हमें भी चाहिए नागपुर-पुणे जैसा मंच’

गोंदिया के स्थानीय कलाकारों का मानना है कि जिले में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. कलाकारों का कहना है, “अगर मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों की तरह हमारे पास भी एक सुसज्जित थिएटर होता, तो हम अपनी कला को और बेहतर ढंग से लोगों के सामने पेश कर पाते.” वर्तमान में सुविधाओं के अभाव में कलाकारों को छोटे कार्यक्रमों के लिए भी निजी हॉल या अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता है.

नगर परिषद के मुख्य अधिकारी संदीप बोरकर ने इस मामले पर नया अपडेट दिया है. उन्होंने बताया कि अब इस थिएटर की नई ‘आउटलाइन’ तैयार की जाएगी. बढ़ी हुई लागत के साथ सरकार से नए सिरे से फंड की मांग की जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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