Green energy : गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत की दिशा में एक नई पहल की है. जिले के चार थाने अब सौर ऊर्जा से पूरी तरह संचालित हो रहे हैं. इन थानों में इतनी बिजली तैयार हो रही है कि विभाग भविष्य में अतिरिक्त ऊर्जा को बिजली विभाग को बेचने की योजना बना रहा है. यह पहल पुलिस को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा अभियान को भी मजबूत करेगी.
जिले के जिन थानों में सौर पैनल लगाए गए हैं, उनमें दनकौर, रबुपुरा, जारचा और दादरी थाना शामिल हैं. इन स्थानों पर प्रतिदिन लगभग पैंतीस से चालीस किलोवाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जो थानों की आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त है. (Green energy)
यह सौर प्रणाली कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व निधि (सीएसआर फंड) के अंतर्गत लगाई गई है, जिससे सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ा.
अब इन थानों में बिजली कटौती की समस्या समाप्त हो गई है. अधिकारी बताते हैं कि यह कदम कार्बन मुक्त पुलिस स्टेशन बनाने की दिशा में मिसाल साबित हुआ है.
गौतमबुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जिले में कुल 27 थाने हैं. इनमें से चार थानों को पहले चरण में सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है. अगले चरण में शेष थानों, पुलिस चौकियों और पुलिस आयुक्त कार्यालय को भी सौर प्रणाली से जोड़ा जाएगा. (Green energy)
आयुक्त ने कहा कि लक्ष्य है कि पूरा पुलिस तंत्र पर्यावरण के अनुकूल बने और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता समाप्त हो. इसके साथ ही सभी थानों को हरित भवन मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा.
इन थानों में बिजली उत्पादन क्षमता इतनी है कि कुछ स्थानों पर आवश्यकता से अधिक बिजली बन रही है। पुलिस विभाग ने तय किया है कि यह अतिरिक्त बिजली राज्य के बिजली ग्रिड को बेची जाएगी.
इससे प्राप्त धनराशि का उपयोग पुलिस थानों के सुधार कार्यों, पुलिस कर्मियों के कल्याण और नई ऊर्जा परियोजनाओं में किया जाएगा.
यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जिससे न केवल बिजली की बचत होगी बल्कि विभाग को आर्थिक लाभ भी मिलेगा
सौर पैनलों की स्थापना से अब थानों में बिजली की अनियमितता की समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है.
पहले गर्मी के मौसम में बार-बार बिजली जाने से कंप्यूटर प्रणाली, अभिलेख अद्यतन और सीसीटीवी संचालन में परेशानी आती थी.
अब सभी थाने दिन-रात बिजली से रोशन हैं और कार्य बिना बाधा के चल रहे हैं. इससे न केवल कामकाज की गति बढ़ी है, बल्कि पुलिस की कार्यकुशलता में भी सुधार हुआ है.
विशेषज्ञों का कहना है कि एक किलोवाट सौर ऊर्जा से प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है.
इस आधार पर देखा जाए तो गौतमबुद्ध नगर के ये चार थाने सालाना लगभग साठ टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में योगदान दे रहे हैं. (Green energy)
यह कदम प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सौर मिशन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हरित उत्तर प्रदेश, स्वच्छ उत्तर प्रदेश योजना के अनुरूप भी है.
भारत एक्सप्रेस
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