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पुर्तगाल का आईपी एड्रेस, सिग्नल ऐप से कत्लेआम…! गुरुग्राम एनकाउंटर के बाद खुली दीपक नांदल गैंग की वो खूंखार कुंडली

मिलेनियम सिटी गुरुग्राम के सुशांत लोक फेज-2 में गुरुवार की आधी रात को जो (Gurugram Encounter Deepak Nandal Gang) हुआ, वो सिर्फ एक आम पुलिस एनकाउंटर नहीं था. वह दरअसल विदेश में बैठकर दिल्ली-एनसीआर को दहलाने वाले एक बहुत ही खूंखार और हाई-टेक क्रिमिनल सिंडिकेट का लाइव क्लाइमेक्स था. क्राइम ब्रांच की टीम ने स्कॉर्पियो सवार जिन चार शूटरों को मौके पर ही ढेर किया है, वे कोई मामूली अपराधी नहीं थे. वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैर पसार चुके दीपक नांदल गैंग के वो ‘डेथ स्क्वाड’ थे, जो विदेश में बैठे अपने आका के एक रिमोट इशारे पर किसी की भी जान लेने का ठेका लेते हैं.

इस एनकाउंटर ने एनसीआर की सरजमीं पर एक्टिव एक ऐसे खूंखार अंडरवर्ल्ड नेटवर्क की पोल खोल दी है, जिसकी जड़ें भारत से हजारों किलोमीटर दूर पुर्तगाल, दुबई और लंदन तक फैली हुई हैं. आइए खंगालते हैं इस खतरनाक गैंग की वो पूरी कुंडली, जिसने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की रातों की नींद उड़ा रखी है.

कितना हाई-टेक है नांदल का नेटवर्क?(Gurugram Encounter Deepak Nandal Gang)

गैंगस्टर दीपक नांदल आज के दौर का वो शातिर और डिजिटल क्रिमिनल है, जो खुद कभी क्राइम स्पॉट पर नहीं आता. वह भारत के कानून की पहुंच से दूर विदेशों में सुरक्षित बैठकर अपने शूटरों को उंगलियों पर नचाता है. स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ की पिछली जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि दीपक नांदल के गुर्गों के मोबाइल फोन जब ट्रैक किए गए, तो नांदल का डिजिटल लोकेशन और आईपी एड्रेस सीधे पुर्तगाल का निकल कर आया था.

इतना ही नहीं, खुफिया सूत्रों का दावा है कि पुर्तगाल के बाद अब वह दुबई या लंदन के किसी आलीशान ठिकाने से अपना सिंडिकेट ऑपरेट कर रहा है. वह वहीं बैठे-बैठे इंटरनेट और डार्क वेब के जरिए हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के लोकल लड़कों को अपने जाल में फंसाता है और उन्हें अत्याधुनिक हथियारों की सप्लाई लाइन मुहैया कराता है.

ट्रेक करना पुलिस के लिए भी सिरदर्द

इस खूंखार गैंग के काम करने का तरीका बेहद चालाक और पेशेवर है. दीपक नांदल अपने गुर्गों और शार्प शूटरों से बातचीत करने के लिए कभी भी नॉर्मल मोबाइल नेटवर्क या व्हाट्सऐप का इस्तेमाल नहीं करता. इस गैंग का पूरा कम्यूनिकेशन पूरी तरह से जंगी और सिग्नल जैसे मिलिट्री-ग्रेड एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए होता है. नांदल विदेश से सीधे इन ऐप्स पर वॉयस नोट या मैसेजेस के जरिए टारगेट की पूरी डिटेल, उसका पता और उसकी फोटो अपने शूटरों को भेजता है. काम खत्म होने के बाद इन ऐप्स से चैट अपने आप डिलीट हो जाती है, जिससे पुलिस के लिए इन क्रिमिनल्स के बीच का लिंक और उनकी अगली साजिश का पता लगाना एक बहुत बड़ा सिरदर्द बन जाता है. इसी अभेद्य डिजिटल किले के दम पर यह गैंग महीनों से पुलिस को चकमा दे रहा था.

एटीएम की कैश डिपॉजिट मशीन से फंडिंग

दीपक नांदल गैंग (Gurugram Encounter Deepak Nandal Gang) की कुंडली में सबसे हैरान करने वाला पहलू इसकी मनी ट्रेल यानी पैसों के लेन-देन का तरीका है. आम तौर पर गैंगस्टर हवाला या सीधे बैंक ट्रांसफर से पैसे लेते हैं, लेकिन नांदल का दिमाग इससे कहीं आगे चलता है. जब यह गैंग दिल्ली-एनसीआर के बड़े बिल्डरों, डॉक्टरों या यूनिवर्सिटी मालिकों से करोड़ों की रंगदारी मांगता है, तो पैसा सीधे किसी एक अकाउंट में नहीं मंगवाया जाता. नांदल के निर्देश पर रंगदारी देने वाले व्यापारियों को सीधे अलग-अलग शहरों के एटीएम बूथों पर भेजा जाता है.

वहां जाकर वे सीधे कैश डिपॉजिट मशीनों यानी सीडीएम के जरिए उन अनजान खातों में नकद पैसा जमा करते हैं जो गैंग के गुर्गों के होते हैं. इस तरीके से कोई डिजिटल सिग्नेचर या सीधा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन नहीं होता, जिससे पुलिस के लिए पैसों के असली सोर्स तक पहुंचना नामुमकिन जैसा हो जाता है.

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एसजीटी यूनिवर्सिटी का मालिक था टारगेट?

गुरुग्राम का यह एनकाउंटर (Gurugram Encounter Deepak Nandal Gang) इस बात का सबूत है कि नांदल गैंग किस हद तक बेखौफ और खूंखार हो चुका है. इस बार उनका सीधा टारगेट एसजीटी यूनिवर्सिटी के संस्थापक के बेटे और पार्टनर विशाल बेरी थे. विशाल बेरी से पिछले कई दिनों से एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम रंगदारी मांगी जा रही थी. बेरी ने जब इस धमकी को हल्के में लिया, तो लंदन या दुबई में बैठे नांदल ने अपने शूटरों को सीधे ‘सूट-एट-साइट’ का ऑर्डर दे दिया.

स्कॉर्पियो गाड़ी में अत्याधुनिक विदेशी हथियारों के साथ आए पांचों शूटर सुशांत लोक स्थित बेरी के आलीशान बंगले के भीतर गोलियां बरसाते हुए घुस गए थे. अगर क्राइम ब्रांच की टीम सही वक्त पर पूरी तैयारी के साथ वहां नहीं पहुंचती और चारों शूटरों को ढेर नहीं करती, तो मिलेनियम सिटी में एक बहुत बड़ा और खूनी कत्लेआम होना बिल्कुल तय था.

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-भारत एक्सप्रेस

 

Rohit Agrawal

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