रिपोर्ट- मनोज चौबे
सागर जिले में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद अब ग्वालियर-चंबल अंचल में अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन और पुलिस ने मोर्चा खोल दिया है. पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें लगातार शराब के अवैध ठिकानों पर दबिश दे रही हैं. कार्रवाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक संभाग के आठ जिलों में 224 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 122 शराब तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है.
इस अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध शराब भी बरामद हुई है. अधिकारियों के मुताबिक अलग-अलग कार्रवाई में 3188 लीटर से ज्यादा अवैध शराब जब्त की गई है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा दतिया जिले से सामने आया, जहां अकेले 1702 लीटर अवैध शराब पकड़ी गई.
ग्वालियर जिले में कलेक्टर रुचिका चौहान और एसएसपी धर्मवीर सिंह के निर्देश पर अभियान को तेज किया गया है. 1 से 12 सितंबर के बीच महज 12 दिनों में पुलिस ने आबकारी अधिनियम के तहत 133 प्रकरण दर्ज किए. वहीं आबकारी विभाग ने सात दिनों के अभियान में 59 मामले बनाए हैं.
कार्रवाई के दौरान पुलिस और आबकारी टीमों ने 2300 लीटर एथनॉल, 50 लीटर ओपी और 304 लीटर शराब बरामद की है. खास बात यह है कि शराब के निर्माण से लेकर उसके परिवहन, भंडारण और बिक्री तक जुड़े लोगों पर नजर रखी जा रही है. ग्वालियर में सबसे ज्यादा कार्रवाई महाराजपुरा थाना क्षेत्र में हुई, जहां 12 मामले दर्ज किए गए. इसके बाद डबरा में 11 और पुरानी छावनी में 9 प्रकरण सामने आए. ग्वालियर, घाटीगांव और डबरा देहात में 6-6 मामले दर्ज हुए. आंतरी, इंदरगंज, उटीला, पिछोर, बिलौआ, भितरवार, माधौगंज, मुरार, विश्वविद्यालय और सिरोल में 4-4 प्रकरण दर्ज किए गए. वहीं कंपू, गिरवाई, गोला का मंदिर, झांसी रोड, तिघरा और हस्तिनापुर में 3-3 मामले सामने आए.
आरोन, करहिया, गिजोरी, चीनोर, पनिहार, बहोड़ापुर, बिजौली, बेहट, मोहना और हजीरा में 2-2 प्रकरण दर्ज किए गए. कोतवाली लश्कर, जनकगंज, पड़ाव, बेलगढ़ा और भंवरपुरा में एक-एक मामला दर्ज हुआ.
लगातार हो रही दबिश से अवैध शराब का कारोबार करने वालों में खलबली मची हुई है. कई तस्कर पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं, जबकि कार्रवाई की भनक लगते ही कुछ आरोपी भूमिगत हो गए हैं. पुलिस और प्रशासन अब ऐसे लोगों की तलाश में जुटे हैं.
अधिकारियों का कहना है कि अवैध शराब के निर्माण और बिक्री से जुड़े नेटवर्क पर थाना स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है. सिर्फ शराब बेचने वालों ही नहीं, बल्कि इसे बनाने, एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और छिपाकर रखने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है.
ग्वालियर में जहरीली शराब का मामला नया नहीं है. अप्रैल 2021 में भी जहरीली शराब पीने से दो लोगों की मौत हुई थी, जबकि चार से ज्यादा लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी. उस घटना के बाद ग्वालियर और आसपास के इलाकों में अवैध शराब के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था.
तब प्रशासन और आबकारी विभाग ने कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर दबिश दी थी. हालांकि समय बीतने के साथ हालात फिर सामान्य होते गए और अवैध शराब का कारोबार दोबारा पैर पसारता नजर आया.
अब सागर की घटना के बाद एक बार फिर प्रशासन की कार्रवाई तेज हुई है. कुछ ही दिनों में जिस तरह बड़ी मात्रा में शराब और शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद हुई है, उससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इतने समय से यह नेटवर्क किस तरह चलता रहा.
अवैध शराब का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है. इसका सीधा असर लोगों की जिंदगी पर पड़ता है. जहरीली शराब की एक खेप भी कई परिवारों को तबाह कर सकती है. ऐसे में मौजूदा कार्रवाई के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि अवैध शराब के ठिकानों पर लगातार नजर रखी जाए, ताकि कुछ समय बाद हालात फिर पहले जैसे न हो जाएं.
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-भारत एक्सप्रेस
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