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वफादारी की मिसाल! भारी बर्फबारी के बीच 4 दिन तक मालिक के शव के पास बैठा रहा कुत्ता, रेस्क्यू टीम के उड़ गए होश

आपने साल 2009 में आई हॉलीवुड फिल्म “हाची: ए डॉग टेल्स” देखी होगी, जिसमें एक कुत्ता अपने मालिक की मौत के 10 सालों तक उसका एक स्टेशन पर इंतेजार करता रहा. यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है. कुछ ऐसा ही एक मामला हिमाचल प्रदेश से आया है. जहां एक पालतु पिटबुल कुत्ता 19 साल के युवक और 13 साल के बच्चे की मौत के बाद भी शव छोड़कर नहीं गया और भूखा प्यासा 4 दिनों तक वहीं बैठकर उनका इंतजार करता रहा.

यह मामला हिमाचल प्रदेश के चंबा का है. जहां 23 जनवरी को 5 फीट से अधिक बर्फबारी देखने को मिली. इसी दिन 19 साल का विकसित राणा अपने मामा के 13 साल के लड़के पीयूष के साथ प्रसिद्ध भरमाणी मंदिर दर्शन करने गए थे. भारी बर्फबारी के बीच दोनों ऊपर पहुंचे और वीडियो बनाने के क्रम में लापता हो गए.

शव के पास बैठा रहा कुत्ता

दोनों के साथ उनका डॉगी भी साथ था. दोनों अपने साथ कैंपिंग के लिए भी सामान ले गए थे. आशंका जताई जा रही है कि इसी दौरान दोनों भारी बर्फबारी के बीच फंस गए और उनकी मौत हो गई. उनका शव 4 दिनों तक बर्फ के बीच पड़ा रहा. इस दौरान उनका डॉगी उनके शव के पास बैठा रहा.

4 दिनों के बाद सोमवार को जब रेस्क्यू टीम वहां पहुंची तो उनके होश उड़ गए. कुत्ता उस समय भी शव के पास ही बैठा हुआ था. उसके गले में हल्की चोट भी लगी हुई थी.

जानकारी के अनुसार मृतक विकसित राणा घरेड़ का रहने वाला था, जबकि उसके मामा का लड़का पीयूष मलकोता का रहने वाला था.

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वीडियो के चक्कर में गई जान

बताया जा रहा है कि दोनों युवकों की जान बर्फबारी का वीडियो बनाने की चाहत में चली गई. उनकी तलाश के लिए रेस्क्यू टीम ने ड्रोन और सेना के दो हेलीकॉप्टर की भी मदद ली. रविवार को ही सेना के दो हेलीकॉप्टर भरमौर पहुंचे थे.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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