18 फरवरी 2026, नई दिल्ली: भारत और फ्रांस के बीच संबंध अब और मजबूत हो गए हैं. दोनों देशों ने आर्थिक और रक्षा क्षेत्र में गहरे सहयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण समझौते किए हैं. यह समझौता आयात पर निर्भरता कम करके वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगा. पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने इसकी सराहना की है और कहा है कि यह कदम भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत फायदेमंद साबित होगा.
पहले भारत कई चीजों के लिए आयात पर निर्भर था, लेकिन अब फ्रांस के साथ समझौता वैश्विक सप्लाई चेन में भारत को महत्वपूर्ण भूमिका देगा. यह समझौता डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) को शामिल करता है, जो क्रॉस-बॉर्डर निवेश के लिए स्थिर टैक्स ढांचा देता है. इससे दोनों देशों के बीच निवेश आसान होगा और कंपनियां ज्यादा निवेश कर सकेंगी.
PHDCCI के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा, “यह समझौता क्रॉस-बॉर्डर निवेश के लिए मजबूत टैक्स ढांचा देता है. रक्षा निर्माण, जॉइंट वेंचर और इंडस्ट्रियल क्षमता बढ़ाने से भारत को तुरंत आर्थिक फायदे मिलेंगे. इससे कैपिटल फॉर्मेशन बढ़ेगा, सेक्टर का उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार पैदा होगा और लंबे समय तक उत्पादकता मजबूत होगी.”
फ्रांस भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार है. राफेल विमान कार्यक्रम में दसॉल्ट एविएशन, इंजन और प्रोपल्शन सिस्टम में सैफ्रान और सबमरीन निर्माण में नवल ग्रुप के साथ सहयोग चल रहा है. घरेलू रक्षा उत्पादन से जीडीपी पर सीधा असर पड़ता है.
फ्रांस-भारत जॉइंट वेंचर से कंपोनेंट फैब्रिकेशन, इंजन असेंबली, मेंटेनेंस, एवियोनिक्स, मिसाइल सबसिस्टम और नवल इंटीग्रेशन सिस्टम में क्षमता बढ़ेगी. ये जॉइंट वेंचर हाई-वैल्यू डिजाइन और सिस्टम इंजीनियरिंग पर फोकस करेंगे और घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाएंगे.
रक्षा निर्माण कैपिटल और स्किल इंटेंसिव सेक्टर है. इससे हाई-स्किल्ड रोजगार पैदा होंगे. समय के साथ स्किल डेवलपमेंट से वेतन बढ़ेंगे और उत्पादकता में सुधार होगा. PHDCCI के CEO और सेक्रेटरी जनरल डॉ. रंजीत मेहता ने कहा, “लक्षित रणनीतिक समझौते दोनों देशों के लिए लंबे समय तक इंडस्ट्रियल परिणाम देंगे. नीति का लगातार क्रियान्वयन, घरेलू सप्लाई नेटवर्क मजबूत करना और निरंतर इनोवेशन से आर्थिक फायदे तय होंगे.”
यह समझौता भारत के मैन्युफैक्चरिंग, निवेश, उत्पादकता और स्किल्ड रोजगार को बढ़ावा देगा. दोनों देश अब रक्षा, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं. इससे भारत आत्मनिर्भर बनेगा और वैश्विक स्तर पर मजबूत सप्लाई चेन का हिस्सा बनेगा.
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