Ranchi Student Protest story
Ranchi Student Protest full story: झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं का गुस्सा अब सिर्फ 14वीं जेपीएससी (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है. रांची में शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है. छात्रों का कहना है कि अगर सिर्फ एक परीक्षा की जांच होगी तो समस्या की जड़ कभी सामने नहीं आएगी. इसलिए वे वर्ष 2019 से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी (JSSC) की सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं.
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना लगातार जारी है. आंदोलन शुक्रवार को 14वें दिन में पहुंच गया. प्रदर्शन में शामिल छह छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं. देर रात प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी हुई, लेकिन प्रतिनिधिमंडल को लेकर सहमति नहीं बनने की वजह से वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी.
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर बार-बार विवाद सामने आते रहे हैं. कहीं पेपर लीक के आरोप लगे, कहीं आंसर की पर सवाल उठे, तो कहीं चयन प्रक्रिया और मेरिट सूची को लेकर उम्मीदवारों ने आपत्ति जताई. उनका दावा है कि अलग-अलग मामलों में कुछ गिरफ्तारियां जरूर हुई हैं, लेकिन पूरी सच्चाई अभी तक सामने नहीं आई.
छात्रों का मानना है कि अगर इन मामलों में किसी संगठित गिरोह, बिचौलियों, कोचिंग संस्थानों या अधिकारियों की मिलीभगत रही है, तो उसकी निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से ही संभव है. उनका कहना है कि तभी भर्ती प्रक्रिया पर युवाओं का भरोसा दोबारा कायम हो सकेगा.
आंदोलनकारी कई मांगों को लेकर सरकार के सामने डटे हुए हैं. इनमें वर्ष 2019 से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी की सभी विवादित परीक्षाओं की सीबीआई जांच, जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो उन्हें रद्द कर दोबारा परीक्षा कराना, दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करना, भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू करना शामिल है.
शुरुआत में यह आंदोलन सिर्फ 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा को लेकर था, लेकिन धीरे-धीरे इसमें अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं के अभ्यर्थी भी जुड़ते गए. कई छात्र संगठनों ने इसका समर्थन किया और विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा. छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के आमरण अनशन पर बैठने के बाद आंदोलन को और अधिक गति मिली.
अब प्रदर्शनकारी इसे केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक पिछले वर्षों के विवादित मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक हर नई भर्ती पर संदेह बना रहेगा.
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राज्य सरकार का कहना है कि जिन मामलों में शिकायतें मिली हैं, उनकी जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी भरोसा दिलाया है कि छात्रों के साथ न्याय होगा और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.
इसी बीच सरकार ने पूरे विवाद की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. इस समिति में चार मंत्री शामिल हैं. कांग्रेस की ओर से दीपिका पांडे सिंह, झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से चमरा लिंडा और सुदिव्य कुमार सोनू, जबकि राष्ट्रीय जनता दल की ओर से संजय प्रसाद को समिति में रखा गया है. इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार को भी समिति में शामिल किया गया है ताकि जांच और बातचीत की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सके.
-भारत एक्सप्रेस
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