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‘क्या इसीलिए रोकी थी CBI जांच?’ घोटालों के आरोपी अफसरों की रिहाई पर भड़की बीजेपी, हेमंत सरकार को घेरा

Jharkhand Scam: झारखंड की राजनीति में इन दिनों घोटालों और उनकी जांच को लेकर एक बार फिर से भूचाल आ गया है. राज्य में एक के बाद एक कई बड़े खुलासे हुए, चाहे वह जमीन घोटाला हो, शराब घोटाला या फिर नियुक्ति घोटाला. इन तमाम मामलों ने शुरुआत में खूब सुर्खियां बटोरीं और सीबीआई जांच की मांग भी जोर-शोर से उठी. हालांकि, सरकार ने इन सभी मामलों की जांच का जिम्मा अपनी ही एजेंसियों जैसे एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और सीआईडी को सौंप दिया. अब जैसे-जैसे इन मामलों में आरोपी आईएएस अधिकारी और दूसरे कर्मचारी जमानत पाकर जेल से बाहर आ रहे हैं, वैसे-वैसे विपक्ष को सरकार को घेरने का एक और बड़ा मौका मिल गया है.

क्या इसीलिए CBI जांच से बचा जा रहा था?

शुरुआत से ही विपक्ष इन स्थानीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को महज एक दिखावा या ‘आई वॉश’ करार देता रहा है. अब जब आरोपी अधिकारी कानूनी कमियों या ढीली पैरवी के चलते जेल से बाहर आ रहे हैं, तो बीजेपी हमलावर हो गई है. पार्टी का सीधा सवाल है कि क्या यही वजह थी कि सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों यानी सीबीआई (CBI) को जांच देने से लगातार इनकार किया था?

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी लगातार इन मामलों में जांच एजेंसियों के ढीले रवैये पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं. हाल ही में शराब घोटाले के मामले में सामने आए ढीले रुख को लेकर भी उन्होंने सोशल मीडिया और पत्रों के जरिए सरकार पर तीखे हमले किए हैं. उनका साफ कहना है कि जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है ताकि अपनों को बचाया जा सके.

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सत्ता पक्ष का पलटवार

दूसरी तरफ, कांग्रेस जैसे सत्ताधारी दल विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे महज राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं. सत्ता पक्ष का कहना है कि बाबूलाल मरांडी सिर्फ पत्र लिखकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, जबकि असल मुद्दों से भटकाने के लिए ऐसे आरोप लगाए जाते हैं. कांग्रेस इस पर पलटवार करते हुए देश के दूसरे बड़े मुद्दों जैसे चंदा चोरी और लोकतंत्र की हत्या का जिक्र करने लगती है.

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस राजनीतिक खींचतान के बीच राज्य की साख दांव पर लगी है. जमीन, शराब और नियुक्ति जैसे बड़े घोटालों में अगर जनता को इंसाफ नहीं मिला, तो प्रशासनिक व्यवस्था से भरोसा उठना तय है. जनता यह देखना चाहती है कि सियासत से ऊपर उठकर इन गंभीर मामलों में पारदर्शी कार्रवाई कब होगी, जिससे सरकार की नीयत पर उठ रहे सवालों के जवाब मिल सकें.

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-भारत एक्सप्रेस

मधुकर आनंद, ब्यूरो चीफ़, भारत एक्सप्रेस, रांची

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