Jodhpur Census 2026: जोधपुर/प्रदीप: “अंधेर नगरी और चौपट राजा” वाली कहावत राजस्थान के जोधपुर नगर निगम पर बिल्कुल सटीक बैठती है. यहां जिला प्रशासन द्वारा जनगणना की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपी गई थी, लेकिन निगम ने जो ड्यूटी लिस्ट जारी की है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है. प्रशासन ने जनगणना के लिए ऐसी लिस्ट तैयार की है, जिसमें कई ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं जिनका सालों पहले निधन हो चुका है या जो अपनी सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त (रिटायर) हो चुके हैं.
जोधपुर शहर में जनगणना का कार्य सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए कार्यालय प्रमुख जनगणना अधिकारी और निगम कमिश्नर सिद्धार्थ पालानीचामी की ओर से 2084 लोगों की एक ड्यूटी लिस्ट जारी की गई है. लेकिन इस लिस्ट को देखकर साफ पता चलता है कि इसे बिना किसी छंटनी, अपडेट और वेरिफिकेशन के जारी कर दिया गया है.
लापरवाही की हद पार करने वाला एक मामला लाला लाजपत राय कॉलोनी का है. यहां रहने वाली नसीम बानो ने बताया कि उनके पति अब्दुल वाहिद जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी (JNVU) में UDC के पद पर कार्यरत थे. 10 मई 2024 को उनका निधन हो गया था. सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि जोधपुर नगर निगम ने ही 15 मई 2024 को उनका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया था.
इसके बावजूद, अपनी ही जानकारी को नजरअंदाज करते हुए निगम ने एक मृत व्यक्ति की ड्यूटी जनगणना में लगा दी. नसीम बानो ने इस घोर लापरवाही पर भारी आक्रोश जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
लापरवाही का दूसरा ताजा मामला रामापीर कॉलोनी के दीपक अवस्थी का है. वे भी JNVU में UDC रह चुके थे. इसी साल 13 फरवरी 2026 को उनका निधन हुआ था और 14 फरवरी को कागा स्वर्ग आश्रम में उनका अंतिम संस्कार किया गया था. फिर भी प्रशासन ने आंखें मूंदकर उनका नाम इस ड्यूटी लिस्ट में शामिल कर दिया है.
अगस्त 2024 में विश्वविद्यालय की सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके अशोक व्यास का नाम भी इस लिस्ट में है. उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि मैं नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से पूछना चाहूंगा कि किस अधिकार से उन्होंने मेरी ड्यूटी लगाई? यह लिस्ट देखकर ऐसा लगता है कि उन्होंने आंखें बंद कर बस नाम थोप दिए हैं.
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अशोक व्यास ने यह भी बताया कि उनके साथ ही रिटायर हुए वीरम राम और मुना राम का नाम भी इसी लिस्ट में डाल दिया गया है. प्रशासन की इस घोर लापरवाही को देखते हुए अब आम लोगों और पूर्व कर्मचारियों द्वारा ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है.
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