Karnataka Leadership Change news: कर्नाटक की राजनीति में पिछले कई महीनों से सुलग रही ‘नेतृत्व परिवर्तन’ की चिंगारी आखिरकार गुरुवार सुबह एक बड़े कूटनीतिक और भावुक ड्रामे के साथ शांत होती दिख रही है. बेंगलुरु में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के आधिकारिक आवास ‘कावेरी’ पर आयोजित एक हाई-प्रोफाइल ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिसने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है.
मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहे उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने न सिर्फ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को गले लगाया, बल्कि झुककर उनके पैर छुए और आशीर्वाद लिया. कूटनीतिक हलकों में इसे कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता के ‘स्मूथ ट्रांजिशन’ यानी बिना किसी बगावत के नेतृत्व सौंपने के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है.
इस ‘ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी’ की जमीन दो दिन पहले ही दिल्ली में तैयार हो चुकी थी. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल के साथ दिल्ली में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की कई दौर की मैराथन बैठकें हुईं.
सूत्रों के मुताबिक, हाईकमांड ने 77 वर्षीय दिग्गज ओबीसी नेता सिद्धारमैया को सम्मानजनक विदाई देते हुए आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में भेजने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि पार्टी आलाकमान आधिकारिक तौर पर इस बदलाव को ‘अफवाह’ बताता रहा, लेकिन अंदरूनी तौर पर ढाई-ढाई साल के सत्ता के वादे (Power Sharing Formula) को अमलीजामा पहनाने की तैयारी पूरी कर ली गई थी.
गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री आवास पर नाश्ते की यह मेज सिर्फ खाने के लिए नहीं, बल्कि धन्यवाद प्रस्ताव के लिए सजी थी. गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने खुद मीडिया को बताया कि मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देने से पहले कैबिनेट के सभी सहयोगियों को उनके सहयोग के लिए शुक्रिया कहने के लिए बुलाया था. इस भावुक बैठक में मंत्री एचके पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, प्रियांक खड़गे और बायराथी सुरेश समेत कई दिग्गज विधायक पहुंचे.
इसी बैठक के दौरान जब डीके शिवकुमार अंदर पहुंचे, तो दोनों दिग्गजों ने पहले एक-दूसरे को गले लगाया और फिर डीके ने पैर छूकर सिद्धारमैया का आशीर्वाद लिया, जो यह साफ कर रहा है कि अब कमान ‘कनकपुरा के संकटमोचक’ के हाथों में जाने वाली है.
पार्टी में भले ही सब कुछ ‘ऑल इज वेल’ दिखाने की कोशिश की जा रही हो, लेकिन सिद्धारमैया के समर्थकों में इस फैसले को लेकर गहरी मायूसी और कड़वाहट है. सिद्धारमैया कर्नाटक में ‘अहिंदा’ यानी दलित, पिछड़े (OBC) और अल्पसंख्यकों के सबसे बड़े सोशल गठबंधन के चेहरे हैं. उनके हटने से इस वोट बैंक के खिसकने का खतरा है.
वहीं दूसरी तरफ, डीके शिवकुमार प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं और पार्टी के सबसे बड़े ‘संकटमोचक’ और फाइनेंसर माने जाते हैं. कांग्रेस इस बदलाव के जरिए २०२९ के लोकसभा चुनावों के लिए राज्य में एक युवा और आक्रामक लीडरशिप को स्थापित करना चाहती है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
पूर्व मॉडल ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई, समर्थ सिंह और गिरिबाला…
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 14…
नवरात्रि के छठे दिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि…
CM Yogi Panchagavya Scheme: उत्तर प्रदेश में गो आधारित उत्पादों की बिक्री और विपणन को…
वाराणसी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'स्वच्छता मित्र' सम्मान समारोह में सफाईकर्मियों के…
PC JEWELLER MEGA BULK DEAL: भारतीय शेयर बाजार में जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर की प्रमुख…