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भारत में कैंपस खोलेगी विश्व प्रसिद्ध लिवरपूल यूनिवर्सिटी, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति में दिया गया ‘लेटर ऑफ इंटेंट’

यूनाइटेड किंगडम (UK) की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी लिवरपूल को भारत में कैंपस खोलने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति में औपचारिक रूप से ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ दिया गया. कार्यक्रम मे मुख्य अथिति और अध्यक्ष के तौर पर HRD मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान मौजूद रहे. लिवरपूल विश्वविद्यालय यूके की प्रमुख संस्थाओं में से एक है. इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि वैश्विक शैक्षणिक प्रतिष्ठान के रूप में यह भारत के साथ उच्च शिक्षा में मजबूत साबित होंगी.

इस कार्यक्रम में मौजूद मैडम लिंडी कैमरोन, ब्रिटिश उच्चायोग की प्रतिनिधि, भारत में ब्रिटिश हाई कमीशन के अधिकारी, यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के वाइस चांसलर प्रोफेसर टीम जॉन, प्रोफेसर तारिक अली, प्रो वाइस चांसलर – वैश्विक साझेदारी, विनीत जोशी, उच्च शिक्षा सचिव एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अध्यक्ष ने इस शुरुआत को भारत के युवाओं के लिए बड़ी उपलब्धि बताया.

2002 से NIMHANS के साथ है समझौता

यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल (University of Liverpool) का बेंगलुरु में विभिन्न शैक्षिक और शोध साझेदारियों के माध्यम से सक्रिय है. इनमें बेंगलुरु की NIMHANS के साथ दीर्घकालिक सहयोग रहा है. लीवरपूल यूनिवर्सिटी  और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (NIMHANS), बेंगलुरु के बीच 2002 से सहयोग चल रहा है.

इस साझेदारी में मस्तिष्क संक्रमण, बाल एवं मातृ मानसिक स्वास्थ्य, मस्तिष्क इमेजिंग और मिर्गी जैसे क्षेत्रों पर अनुसंधान किया जा रहा है.

2025 में यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल और कर्नाटक सरकार ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए है. जिसका उद्देश्य शिक्षा, कौशल विकास और शोध में सहयोग को बढ़ावा देना है. इस साझेदारी के तहत, एक संयुक्त पीएचडी कार्यक्रम की योजना बनाई गई है, जिससे दोनों संस्थानों के शोधकर्ताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा.

मुझे खुशी है यूनिवर्सिटी भारत में अपना कैंपस शुरू कर रही

इस मौके पर उपस्थित केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मुझे खुशी है कि यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल भारत में अपना कैंपस शुरू कर रही है. यह भारत और यूके के बीच उच्च शिक्षा में बढ़ती साझेदारी का प्रतीक है. भारत युवा देश है, जहां 4 करोड़ छात्र उच्च शिक्षा में हैं और यहां शिक्षा का स्तर लगातार बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, जिसमें शिक्षा, शोध और नवाचार की बड़ी भूमिका है. लिवरपूल यूनिवर्सिटी द्वारा बेंगलुरु जैसे नवाचार केंद्रों में उपस्थिति और भारतीय कंपनियों के साथ सहयोग स्वागत योग्य कदम हैं. इससे भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनने में मदद मिलेगी और हम ऐसे वैश्विक नागरिक तैयार कर पाएंगे जो दुनिया के विकास में योगदान देंगे.

भारत और यूके बीच सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

भारत और यूके के बीच उच्च शिक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए लिवरपूल विश्वविद्यालय को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति दी गई. भारत युवा आबादी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ वैश्विक शिक्षा का केंद्र बन रहा है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाना है. विदेशी विश्वविद्यालयों की भारत में उपस्थिति से नवाचार, शोध और वैश्विक साझेदारी को बल मिलेगा. लिवरपूल जैसे संस्थानों से आशा है कि वे भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और वैश्विक नागरिक तैयार करने में योगदान देंगे.


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-भारत एक्सप्रेस

आदित्य द्विवेदी

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